हरियाणा और पंजाब के बीच दशकों से चला आ रहा सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद अब एक बार फिर से चर्चा में है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक नई पहल की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों—हरियाणा के नायब सिंह सैनी और पंजाब के भगवंत मान को चिट्ठी भेजकर जल्द बैठक के लिए बुलाया है। संभावना है कि यह अहम बैठक 10 जुलाई के आसपास दिल्ली में हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में दोनों राज्यों को SYL विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने जल शक्ति मंत्री को केवल “मूक दर्शक” न बने रहने की हिदायत देते हुए सक्रिय भूमिका निभाने को कहा था। इसी के बाद नए जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने इस दिशा में पहल करते हुए दोनों मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है।
यह विवाद 1981 में पंजाब और हरियाणा के बीच हुए जल समझौते से जुड़ा है। इस समझौते के तहत सतलुज नदी का पानी हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में बांटने के लिए SYL नहर बनाई जानी थी। कुल 214 किलोमीटर लंबी इस नहर में 122 किमी हिस्सा पंजाब में और 92 किमी हिस्सा हरियाणा में आता है। हरियाणा ने तो अपनी तरफ की नहर पूरी कर ली है, लेकिन पंजाब ने 1982 में निर्माण कार्य रोक दिया। इसके बाद से विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 2004 में पंजाब सरकार ने विधानसभा में एक कानून पारित कर 1981 के समझौते को खारिज कर दिया। लेकिन 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया। फिर भी नहर का निर्माण अब तक अधूरा है।
6 मई 2024 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी. आर. गवई ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना है। जिस जमीन का अधिग्रहण नहर बनाने के लिए किया गया था, उसे फिर से गैर-अधिसूचित कर देना कोर्ट के आदेशों की अनदेखी है। SYL नहर न बनने से हरियाणा को अब तक करीब 19,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। खासतौर पर दक्षिण हरियाणा की 10 लाख एकड़ जमीन आज भी सूखे की मार झेल रही है। अगर यह नहर 1983 में बन जाती, तो राज्य हर साल 42 लाख टन अधिक खाद्यान्न पैदा कर सकता था। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में यह सारे आंकड़े सामने रखे थे। उन्होंने बताया था कि SYL नहर से हरियाणा का कृषि उत्पादन और किसानों की आय में बड़ा सुधार हो सकता था।
अब जबकि केंद्र सरकार ने फिर से पहल की है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि पंजाब और हरियाणा के बीच वर्षों पुराना यह जल विवाद बातचीत से हल हो सकता है। 10 जुलाई को होने वाली प्रस्तावित बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। अगर इस बैठक में कोई सहमति बनती है, तो यह हरियाणा के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
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