NEET OMR शीट मामले में CG हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, छेड़छाड़ के आरोपों का नहीं मिला ठोस सबूत

बिलासपुर.

हाईकोर्ट ने कहा है कि नीट उम्मीदवार की OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं और ठोस सबूत के बिना, सिर्फ शक, अंदाजे या अपनी सोच के आधार पर इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि तय तरीका उपलब्ध नहीं था या बेकार था, तो कोई उम्मीदवार परीक्षा लेने वाली संस्था की शिकायत निवारण प्रक्रिया को नजरअंदाज करके सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच नीट यूजी-2026 के एक उम्मीदवार की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपनी मूल OMR शीट दिखाने और अपनी उत्तर पुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता का तर्क था कि हालांकि स्कैन की गई ओएमआर शीट पर रोल नंबर, बुकलेट नंबर और हस्ताक्षर उसके ही थे, लेकिन उसमें दिए गए उत्तर परीक्षा के दौरान उसके द्वारा चिह्नित उत्तरों से काफी अलग थे। छात्र ने आरोप लगाया कि उसकी मूल OMR शीट से छेड़छाड़ की गई, जिसके कारण अपने द्वारा किए गए उत्तरों के आधार पर अपेक्षित 600 से अधिक अंकों के बजाय केवल 200 अंक मिले।

प्रतिवादियों ने याचिका का किया विरोध
प्रतिवादियों ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि तय प्रक्रिया का पालन न करने और शिकायत निवारण तंत्र को नजरअंदाज करने के कारण याचिकाकर्ता कोर्ट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का लाभ नहीं मांग सकता।

केवल खुद तैयार तुलना चार्ट पर आधारित था आरोप
कोर्ट ने माना कि हेरफेर का याचिकाकर्ता का आरोप पूरी तरह से प्रश्न पुस्तिका और स्कैन की गई ओएमआर शीट की उसकी अपनी तुलना और खुद तैयार किए गए तुलना चार्ट पर आधारित है। कोर्ट ने पाया कि ऐसे दावों और आशंकाओं के अलावा, यह साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र, विश्वसनीय या ठोस सामग्री पेश नहीं की गई कि स्कैन की गई ओएमआर शीट परीक्षा के दौरान जमा की गई असली शीट से अलग थी या प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा कोई हेरफेर किया गया।

कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने टिप्पणी की कि “आधिकारिक परीक्षा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ से जुड़े गंभीर आरोपों को केवल शक, अंदाजे या अपनी सोच के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब कोर्ट के सामने कोई ठोस सबूत प्रस्तुत न किया गया हो।” कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कोर्ट के विशेष ‘रिट अधिकार क्षेत्र’ का इस्तेमाल करने से पहले याचिकाकर्ता ने परीक्षा से जुड़े विवादों के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा विशेष रूप से बनाए गए शिकायत निवारण तंत्र का इस्तेमाल नहीं किया। नीट परीक्षा एक मानक और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाती है। ठोस सबूतों के बिना किसी व्यक्ति की आशंका के आधार पर मूल्यांकन प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप करने से परीक्षा प्रणाली की निश्चितता, पवित्रता और अंतिम स्वरूप पर बुरा असर पड़ेगा।

Rupesh Jha

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