वाशिंगटन
ईरान जंग ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश को घूंट-घूंट कर पानी पिला रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अमेरिकी सेना को हथियारों की कमी का अहसास होने लगा है. ईरान की तरफ से सस्ते ड्रोन और मिसाइल अटैक की वजह से अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों को व्यापक नुकसान उठाना पड़ा है. ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगियों के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनया है. तेहरान के इन हमलों में अमेरिका के कुछ सैनिकों को जान भी गंवानी पड़ी है. यह स्थिति अमेरिका और सहयोगी देशों के कमजोर होते एयर डिफेंस सिस्टम को भी दिखाता है. अमेरिका ईरान के साथ जारी जंग में THAAD एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पुरजोर इस्तेमाल कर रहा है. लगातार यूज की वजह से THAAD में इस्तेमाल होने वाले पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल की कमी खलने लगी है. डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. पेंटागन ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल बनाने के लिए 58.6 अरब डॉलर (₹564691 करोड़) का ठेका दिया है, ताकि मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया जा सके।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने और तेजी से घटते मिसाइल भंडार की भरपाई के लिए रक्षा क्षेत्र का अब तक का एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सेना ने रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन के लिए 58.6 अरब डॉलर का 7 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया है. यह समझौता वित्तीय वर्ष 2026 से 2032 तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य पैट्रियट मिसाइलों के उत्पादन में तेजी लाकर अमेरिकी सेना तथा उसके सहयोगी देशों की जरूरतों को पूरा करना है. पेंटागन के अनुसार, इससे पहले अप्रैल 2026 में लॉकहीड मार्टिन को 4.7 अरब डॉलर का एक वर्षीय अनुबंध दिया गया था. अब उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए 7 साल के मल्टी-ईयर खरीद कार्यक्रम में बदल दिया गया है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब ईरान और यूक्रेन से जुड़े सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका के एडवांस वेपंस और एयर डिफेंस मिसाइल के भंडार पर भारी दबाव पड़ा है।
THAAD और पैट्रियट को लेकर चिंता
हाल के वर्षों में अमेरिका ने यूक्रेन सहित कई सहयोगी देशों को बड़ी संख्या में हथियार उपलब्ध कराए हैं. वहीं, मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य कार्रवाई के दौरान भी अमेरिकी सेना ने बड़ी मात्रा में हथियारों और वायु रक्षा मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. इसके चलते पैट्रियट और थाड (THAAD) जैसे प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के हालिया आकलन के अनुसार, अमेरिकी सेना के पास फिलहाल 1,000 से भी कम पैट्रियट इंटरसेप्टर और 250 से कम थाड इंटरसेप्टर शेष हैं. दोनों प्रणालियों का हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में व्यापक उपयोग हुआ है।
तीन गुना तक बढ़ेगा उत्पादन
लॉकहीड मार्टिन ने कहा है कि नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत वह 2030 तक PAC-3 MSE इंटरसेप्टर मिसाइलों की उत्पादन क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाएगी. कंपनी ने यह भी घोषणा की कि अर्कांसस स्थित अपने कैमडेन संयंत्र में कर्मचारियों की संख्या लगभग 1,200 से बढ़ाकर 1,850 की जाएगी. इसके अलावा कंपनी 2030 तक अमेरिका में 20 से अधिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के आधुनिकीकरण पर 8 से 9 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें अलबामा और अर्कांसस में नए आयुध उत्पादन केंद्र भी शामिल हैं. PAC-3 MSE पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली का अत्याधुनिक हिट-टू-किल इंटरसेप्टर है, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है. अमेरिकी प्रशासन रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रक्षा कंपनियों पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सरकारी अनुबंधों को प्राथमिकता देने का दबाव भी बढ़ाया है।
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