उत्तर प्रदेश

Maulana Qari Ishaq Gaura: मौलाना कारी इसहाक गौरा का बयान, “मुस्लिम समाज अब नाम का मुसलमान”, “मुस्लिम शादियों में होता है सिर्फ दिखावा”, “समाज में न हया बाकी है और न तहजीब”

Maulana Qari Ishaq Gaura: मौलाना कारी इसहाक गौरा का बयान

मौलाना कारी इसहाक गोरा अक्सर अपने बयानों के लिए काफी चर्चा में बने रहते है। अब चाहे बात हो वेलेंटाइन डे वाले बयान की, जिसमें उन्होंने मुसलमानों को ये हिदायत दी थी कि, वे गैर-इस्लामी रस्मों और त्योहारों से दूर रहें। खासतौर पर उन्होंने वैलेंटाइन डे जैसी रस्मों का जिक्र करते हुए कहा था कि, ये इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। इनका इस्लामी संस्कृति से कोई ताल्लुक नहीं है।

या बात हो इस्लाम में पराए मर्द से मेंहदी लगवाने की। उन्होंने कहा है कि, शादी समारोह में मुस्लिम महिलाएं पुरुषों से मेहंदी लगवा रही हैं। ये प्रथा इस्लामी शरीयत के खिलाफ है। और भी ना जाने कितने ऐसे बयान है जिन्होंने मुसलमान को मुसलमान होने का पाठ पढ़ाया है। अब इसी कड़ी में उन्होंने एक और बयान दे दिया है

सहारनपुर में मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुस्लिम शादियों में मर्दों और औरतों के बेहिजाब मेलजोल को शरीअत के खिलाफ बताया है उन्होंने कहा- मुस्लिम समाज अब महज नाम का मुसलमान बनकर रह गया है। इस्लामी शऊर, हया, और तहजीब जैसी बुनियादी चीजें खत्म हो चुकी हैं।

गुरुवार को वीडियो जारी कर देवबंदी आलिम और जमीयत दावतुल मुसलिमीन के संरक्षक मौलाना ने कहा- आज के दौर की मुस्लिम शादियां सिर्फ दिखावे, गैर-जरूरी रस्मों और दुनियावी प्रदर्शन का मजहर बन चुकी हैं।
मौलाना ने कहा- आदमी और औरत एक ही पंडाल में बेहिजाब बैठते हैं। खाते हैं और गुफ्तगू (बातचीत) करते हैं। ये शरीअत की सरासर मुखालफत नहीं तो ओर क्या है?

हमें अफसोस है कि, अब समाज में न हया बाकी है और न ही तहजीब। ऐसा लगता है जैसे हमारी जिंदगी से दीन की रूह निकल चुकी है।
कारी इसहाक गोरा ने कहा- शरीअत में हिजाब की पाबंदी आदमी-औरत दोनों के लिए बराबर है। मर्दों के लिए निगाहों की हिफाजत और औरतों के लिए पर्दा इस्लाम की बुनियादी तालीम है।

मौलाना ने मौजूदा हालात को एक तहजी इनहिटात (सांस्कृतिक पतन) बताया और कहा-हया, अदब और पर्दा ये इस्लामी तहजीब की बुनियादें हैं। लेकिन अफसोस, आज ये बातें सिर्फ मजाक बनकर रह गई हैं। इस्लामी तहजीब रस्म बनकर रह गई है।

वही 21 मई को देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने हेयर फ्लिपिंग डांस को इस्लाम में हराम बताया था। वीडियो जारी कर उन्होंने कहा- औरतों को नाचने के लिए नहीं बनाया गया है। पर्दे के लिए बनाया गया है।
उन्होंने ये बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दौरे को लेकर दिया था। इसमें डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत में मुस्लिम लड़कियां “हेयर फ्लिपिंग डांस” करती दिख रही थीं।

उन्होंने कहा था कि- इस्लाम ने औरत को मां, बहन, बेटी और पत्नी के रूप में सबसे ज्यादा इज्जत दी है। औरत एक कीमती मोती है। जिसे पर्दे और तहजीब से ढका जाता है, न कि कैमरे के सामने नचाया जाता है। पर्दा कोई बेड़ियां नहीं, बल्कि इज्जत की चादर है। उन्होंने कहा- शो बिजनेस नहीं है इस्लाम, ये रूहानी तहजीब है।

वहीं 17 मई को देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने वीडियो जारी कर मुस्लिम युवाओं के टैटू गुदवाने पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने मुसलमान युवाओं से कहा है कि ये ये ट्रेंड इस्लामी शरीयत के खिलाफ है। कहा, ये अल्लाह की बनाई सूरत में तब्दीली’ है। कहा- इस्लाम में जिस्म पर टैटू गुदवाना हराम है।

Kirti Bhardwaj

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