महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बंपर बहुमत मिलता दिख रहा है, लेकिन इन रुझानों पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने शिंदे गुट की शिवसेना की जीत पर आपत्ति जताते हुए इसे महाराष्ट्र की जनता का फैसला नहीं माना। राउत का कहना है कि यह नतीजा लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे यह साफ नहीं होता कि जनता क्या चाहती है। उन्होंने शिंदे गुट के सभी विधायकों की जीत पर सवाल उठाते हुए कहा, “लोग गद्दारों को कैसे जिता सकते हैं?”
रुझानों के अनुसार, महायुति गठबंधन 200 सीटों के आंकड़े को पार कर चुका है। भाजपा 123 सीटों पर, शिवसेना 57 सीटों पर और राकांपा 36 सीटों पर आगे है। वहीं महाविकास अघाड़ी 68 सीटों पर सिमट कर रह गया है, जिसमें कांग्रेस 21, शिवसेना (यूबीटी) 19 और राकांपा (एसपी) 11 सीटों पर आगे है।
संजय राउत ने महायुति की जीत पर आरोप लगाया कि इसमें अदाणी विवाद का भी हाथ है। उन्होंने यह भी कहा कि “हम जानते हैं कि महाराष्ट्र की जनता क्या चाहती है,” और यह नतीजा वास्तविक जनादेश का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। राउत ने महायुति को घेरते हुए दावा किया कि यह चुनावी परिणाम अदाणी समूह से जुड़ी कुछ शक्तियों की ओर से प्रभावित हो सकता है।
हाल ही में अदाणी समूह के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे, जिनमें कंपनियों के दामों में हेरफेर और आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप शामिल थे। राउत ने इस संदर्भ में आरोप लगाया कि महायुति गठबंधन की जीत को अदाणी विवाद से जोड़कर देखा जा सकता है। उनका कहना था कि यह एक प्रकार से राज्य के चुनाव परिणामों पर दबाव डालने की कोशिश हो सकती है, जो कि लोकतंत्र की सही भावना के खिलाफ है।
राउत ने न केवल शिंदे गुट की शिवसेना की जीत पर सवाल उठाए, बल्कि महायुति गठबंधन द्वारा चुने गए नेताओं के चयन और उनके पृष्ठभूमि पर भी निशाना साधा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव परिणाम इस तरह के होते हैं, तो यह लोकतंत्र पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न है।
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