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कोयला घोटाला केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली क्लीन चिट

नई दिल्ली

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोल ब्लॉक आवंटन मामले में समन को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. पूर्व पीएम को उनके निधन के दो साल बाद क्लीन चिट मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दी है. सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने के आदेश को रद्द कर दिया. सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर किया.यह मामला 11 साल से अधिक समय पहले शुरू हुआ था, जब विशेष जज ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी के रूप में समन जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ डॉ. मनमोहन सिंह को इस मामले में कानूनी तौर पर राहत मिली है. यह फैसला उनके निधन के करीब 2 साल बाद आया है। 

सीबीआई ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट
सीबीआई ने जांच के बाद मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है. डॉ. मनमोहन सिंह वर्ष 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे.कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर कई जांच हुई थीं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत की ओर जारी किए गए समन को सुप्रीम  कोर्ट में   2015 में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मनमोहन सिंह को राहत देते हुए रोक लगा दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ सका.जबकि दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो गया.
कोल ब्लॉक आवंटन केस में जांच

कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर कई जांच हुई थीं. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत की ओर जारी किए गए समन को सुप्रीम  कोर्ट में   2015 में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मनमोहन सिंह को राहत देते हुए रोक लगा दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ सका.जबकि दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो गया। 

CJI सूर्यकांत ने दिया आदेश
CJI की बेंच ने कहा कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने या उनके खिलाफ संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था. CJI सूर्यकांत ने कहा, हमने पक्षों के वरिष्ठ वकीलों की कुशल मदद से CBI द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को देखा है.जांच एजेंसी द्वारा दाखिल जांच रिपोर्ट को स्वीकार करने या खारिज करने के मामले में इस कोर्ट द्वारा लगातार तय किए गए पैमानों को ध्यान में रखते हुए, हम इस बात से संतुष्ट हैं कि CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को रद्द करने और संज्ञान लेने का कोई ठोस कारण नहीं था। 

Rupesh Jha

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