6258 751938735545126 976998 335869874784405 501732 417376318 396657688328

इंदौर 

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पर नया अपडेट हैं. मध्य प्रदेश के जिन जिलों से रेल लाइन गुजरनी है, वहां पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और तेज हो गई है. मध्य भारत और पश्चिमी भारत के बीच यह रेल लाइन अहम है. जबकि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच यह रेल लाइन गेम चेंजर साबित होने वाली है. केंद्र सरकार की मंजूरी और पीएम गति शक्ति योजना के तहत इसे अमलीजामा पहनाया जा रहा है. यह प्रोजेक्ट न सिर्फ दो राज्यों की दूरियों को समेटेगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और धार्मिक पर्यटन को भी एक नई रफ्तार देगा. इस परियोजना से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई अहम शहर कनेक्ट होंगे और दोनों राज्यों के बीच व्यापार और तेज होगा। 

मध्य प्रदेश में जमीन अधिग्रहण तेज 
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के लिए मध्य प्रदेश में जमीन अधिग्रहण तेज हो गया है. 309 किलोमीटर रेल परियोजना के लिए 349.789 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण के लिए काम शुरू हो गया है. रेलवे और वन विभाग के बीच सहमति बन चुकी है. इसके तहत मध्य प्रदेश में 207.3023 हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 142.4867 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण होना है. कुल 349.789 हेक्टेयर वन ली जाएगी। 

मनमाड-इंदौर रेल लाइन से जुड़ेंगे यह जिले 

    इंदौर
    धार
    खरगोन 
    बड़वानी 
    धुले
    नासिक 
    मनमाड़ 

इंदौर-मुंबई की दूरी होगी कम
इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी इस रेल लाइन की वजह से कम हो जाएगी. इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही दोनों शहरों के बीच रेलवे लाइन 200 किलोमीटर कम जाएगी. रूट छोटा होने और आधुनिक पटरियों के बिछने से यात्रियों के सफर के समय में कई घंटों की महत्वपूर्ण बचत होगी, जिससे उत्तर भारत से दक्षिण और पश्चिमी भारत का सफर भी सुगम हो जाएगा. रूट छोटा होने और आधुनिक ट्रेनों के संचालन से यात्रियों के सफर के समय में लगभग 4 से 4.5 घंटे की बड़ी बचत होगी. यानि यात्रा के समय में भी बचत होगी। 

एमपी-महाराष्ट्र के लिए अहम 
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की रेल कनेक्टिविटी के लिए सबसे अहम है. यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के इंदौर से शुरू होकर महाराष्ट्र के मनमाड़ तक जोड़ेगा, जिसमें लगभग 170 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश और करीब 139 किमी हिस्सा महाराष्ट्र में आएगा.  परियोजना में मध्य प्रदेश सरकार भी अपनी हिस्सेदारी निभा रही है. रेलवे के इस मेगा प्रोजेक्ट को 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य है. इस  रेल लाइन परियोजना को 18,036 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है। 

क्यों खास है यह रेल लाइन?
इंदौर से मुंबई जाने में 13 घंटे लगते हैं, जो घटकर महज 9 घंटे रह जाएंगे.
अभी इंदौर से मु्ंबई जाने के लिए रतलाम-वडोदरा से ट्रेन जाती है, लेकिन फिर इंदौर से सीधे मनमाड़ से ट्रेनें गुजरेगी। 

यह ट्रैक मध्य प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब ‘पीथमपुर’ को सीधे मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से जोड़ेगा। 

दक्षिण भारत की मध्य भारत के बीच कनेक्टिविटी तेज और आसान हो जाएगी. 
2028-29 के बीच इस रूट पर ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य प्रस्तावित है। 

34 स्टेशन बनेंगे
इस पूरे 309 किलोमीटर के रूट में इंदौर-मनमाड़ के बीच कुल 34 रेलवे स्टेशन आएंगे. जिसमें लगभग 30 नए और कुछ पुराने अपडेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिससे लगभग 1,000 गांवों और 30 लाख से अधिक आबादी को सीधा रेल संपर्क होगा. एमपी में इंदौर, खरगोन, बड़वानी, पीथमपुर, धर्मपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, जुलवानिया, डॉ. अंबेडकर नगर रहेंगे. जबकि महाराष्ट्र में नरडाना, धुले, मालेगांव जैसे बड़े स्टेशन शामिल होंगे।