पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा 2 जुलाई को जम्मू से और 3 जुलाई को कश्मीर से शुरू होने वाली है। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था कठुआ के लखनपुर रिसेप्शन सेंटर में ठहरा हुआ है। यहां से प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें आगे के लिए रवाना किया। यह जत्था अब भगवती नगर स्थित जम्मू बेस कैंप की ओर बढ़ गया है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अच्छे खासे इंतजाम किए हैं।
कठुआ के डीएम राकेश मिन्हास ने बताया कि, ” आज जैसा कि आपने कठुआ में देखा कि बहुत बड़ी संख्या में तीर्थयात्री एकत्रित हुए थे, और आज हमने यहां से पहला जत्था रवाना किया। इस पहले जत्थे में 100 गाड़ियां हैं, जिन्हें हमने सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ रवाना किया, और पूरे उत्साह के साथ तीर्थयात्री भगवती नगर, जम्मू के लिए रवाना हुए। सबसे अच्छी बात जो मैं साझा करना चाहता हूँ, वो ये है कि यहां आए सभी श्रद्धालु और जिनसे हमने बातचीत की, उन सभी ने कहा कि यहां की व्यवस्थाएं, चाहे वो भोजन (लंगर) हो, सफ़ाई हो, रहने की व्यवस्था हो, या सुरक्षा हो, पिछले सालों की तुलना में बेहतर हैं। ये सबसे अच्छी और खुशी की बात है।”
शोबित सक्सेना, एसएसपी ने कहा कि, “जैसा कि हमने आपको पहले बताया था, व्यवस्थाएं बहुत मज़बूत हैं। हम छोटे काफिले के रूप में जत्थों को भेज रहे हैं, जिसमें एस्कॉर्ट पायलट लगे हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तीर्थयात्री सुरक्षित रूप से और जितनी जल्दी हो सके अपने गंतव्य तक पहुंचें। जिला प्रशासन और पुलिस इस प्रयास के लिए पूरी तरह समर्पित है और हम यात्रा के दौरान इसे पूरा करेंगे।”
बता दें कि, तीर्थयात्री पूरे यात्रा मार्ग पर भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय प्रशासन की तारीफ कर रहे हैं। वहीं,इस बीच रामबन जिले में यात्रा मार्ग को सुरक्षित करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं। सुरक्षाकर्मी लगातार गश्त भी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के जत्थे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा काफी सख्त कर दी गई है।
आपको बता दें कि, पूरी तीर्थयात्रा के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा ग्रिड और उन्नत निगरानी प्रणाली सहित कई इंतजाम किए गए हैं। 3,880 मीटर ऊंची अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा दो मार्गों से होती है। अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर नुनवान-पहलगाम ट्रैक और गांदरबल जिले का छोटा लेकिन 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से श्रद्धालु पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं।
