जालंधर हत्याकांड में ASI बर्खास्त, 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड
जालंधर में 13 साल की बच्ची की हत्या के मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने जांच में दोषी पाए गए ASI मंगत राम को नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, PCR में तैनात दो अन्य पुलिस कर्मियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
दरअसल घटना 22 नवंबर की है। जालंधर वेस्ट के बस्ती बावा खेल इलाके से 13 वर्षीय बच्ची लापता हो गई थी। परिवार ने रात को पुलिस को सूचना दी कि, बच्ची गली में टहलते हुए एक घर में जाती दिखी है और उस घर का गेट बंद है। शक होने पर परिवार ने पुलिस को बुलाया।
मौके पर पहुंचने वाले ASI मंगतराम घर के अंदर गए और करीब 20 मिनट तक वहीं रहे। बाहर आकर उन्होंने कहा—“अंदर कुछ नहीं है, लड़की भी नहीं है।” इसके बाद वो वापस थाने लौट गए।
परिवार और पड़ोसियों ने पूरी रात बच्ची को खोजा, लेकिन कोई पता नहीं चला।
करीब 6 बजे, गली के लोगों ने गेट जबरदस्ती खोलकर घर के अंदर तलाशी ली। जैसे ही बाथरूम खोला गया, बच्ची की डेड बॉडी अंदर पड़ी मिली। लोगों ने आरोप लगाया कि, अगर पुलिस ने समय पर सही ढंग से तलाशी की होती, तो संभव है कि बच्ची जिंदा मिल जाती।

जांच के दौरान ASI मंगतराम ने स्वीकार किया कि, उन्होंने कमरे और CCTV फुटेज तो देखे, लेकिन बाथरूम की जांच नहीं की थी—उसी बाथरूम से शव मिला।
वहीं, बच्ची की मां और भाई ने गंभीर आरोप लगाए कि, पुलिस वालों ने उन्हें घर से बाहर निकालकर गेट बंद कर दिया था। परिवार के अनुसार, पुलिस और आरोपी घर के अंदर बैठकर चाय पी रहे थे, कमरे सिर्फ ऊपर-ऊपर से चेक किए गए, पुलिस अगर लापरवाही नहीं करती तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। इन घटना के बाद मोहल्ले में भारी गुस्सा फैल गया और पूरा मामला राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया।
26 नवंबर को पंजाब महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल और चाइल्ड कमीशन के चेयरमैन मौके पर पहुंचे। दोनों ने परिवार को आश्वासन दिया कि, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसी मुलाकात के अगले दिन ASI की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया।
अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और कहा कि, बच्ची के कातिल को फांसी की सजा हो, केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए, किसी भी दोषी को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि, इस घटना को किसी धर्म से जोड़कर न देखा जाए, “पापी का कोई धर्म नहीं होता।”
आपको बता दें कि, मृतका 13 साल की थी और 8वीं क्लास में पढ़ती थी। आरोपी बस ड्राइवर का घर कुछ ही घर छोड़कर पड़ोस में था। ड्राइवर की बेटी और मृतका सहेलियां थीं, और अक्सर एक-दूसरे के घर आती-जाती थीं। CCTV में लड़की शाम 4 बजे गली में टहलती हुई दिखी, जूता ठीक करते हुए रुकती है, और फिर आरोपी के घर में चली जाती है।
उसे ये जानकारी नहीं थी कि, उसकी सहेली उस दिन लुधियाना गई हुई है। जब 30 मिनट बीत गए तो परिवार ने खोज शुरू कर दी। आरोपी के घर का गेट लॉक मिला। CCTV देखकर परिवार और मोहल्ले वालों को शक हुआ और पुलिस को तुरंत बुलाया गया। जब लाश बरामद हुई तो गली के लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और पीटते हुए बाहर लाए।
कार के शीशे तोड़ दिए गए। बाद में पुलिस ने आरोपी को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया और डेड बॉडी पोस्टमार्टम के लिए भेजी। गौरतलब ये है कि पुलिस की लापरवाही के चलते पुलिस कमिश्नर ने ASI को बर्खास्त करने और PCR मुलाजिमों को सस्पेंड करने का फैसला लिया।

