उत्तर प्रदेश

इकरा हसन पर अभद्र टिप्पणी से मचा बवाल, करणी सेना नेता की पोस्ट ने खड़ा किया विवाद, इकरा हसन से ‘निकाह कबूल’ करने की कही बात

इकरा हसन पर अभद्र टिप्पणी से मचा बवाल

 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर योगेंद्र सिंह राणा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और पोस्ट के जरिए कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

उन्होंने वीडियो में खुलेआम इकरा हसन से ‘निकाह कबूल’ करने की बात कही, साथ ही कुछ शर्तें भी रखीं, जिनमें असदुद्दीन और अकबरुद्दीन ओवैसी को ‘जीजा’ कहने की बात भी शामिल थी।
योगेंद्र राणा का यह बयान राजनीतिक से ज़्यादा व्यक्तिगत था, जिसमें उन्होंने सांसद के धर्म, सामाजिक स्थिति और पारिवारिक सम्मान को लक्ष्य बनाते हुए सार्वजनिक रूप से विवाह का प्रस्ताव रखा।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद राणा ने दो घंटे के भीतर यह पोस्ट और वीडियो अपने फेसबुक पेज से हटा दिए, लेकिन तब तक मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ चुका था।

योगेंद्र राणा ने सोशल मीडिया पर कहा –
“मैं कैराना सांसद इकरा हसन से निकाह कबूल फरमाता हूं। वह भी कबूल करें। वह मुस्लिम धर्म अपनाए रखें। मेरे घर में नमाज पढ़ें, मुझे कोई एतराज नहीं है। लेकिन एक शर्त है – असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी मुझे जीजा कहें। मैं टीका लगाता रहूंगा, क्योंकि हमें यहीं रहना है – हिंदू-मुस्लिम भाई।”

इतना ही नहीं, उन्होंने आगे लिखा कि इकरा हसन अविवाहित हैं और वह खुद भी “कम खूबसूरत नहीं” हैं। उन्होंने अपने घर-मकान, संपत्ति और पत्नी से सहमति की बात भी जोड़कर इसे एक मज़ाकिया लहजे में पेश किया, जो कहीं न कहीं एक महिला सांसद के लिए अपमानजनक था।

 

योगेंद्र राणा की इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुरादाबाद के पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने इस बयान को केवल इकरा हसन ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम समाज और संसद का अपमान बताया।

उन्होंने कहा –
“ये बयान एक महिला सांसद के खिलाफ नहीं, पूरे समाज के खिलाफ है। सोचिए, जब एक सांसद महिला का इस तरह से सार्वजनिक अपमान हो सकता है, तो आम बेटियों की सुरक्षा का क्या हाल होगा? यह बयान बीजेपी शासन की बेलगामी मानसिकता का नतीजा है। पुलिस को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

उन्होंने योगेंद्र राणा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए यह भी कहा कि यह सब बयानबाज़ी हिंदू-मुस्लिम तनाव को हवा देने के लिए की जाती है, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। लेकिन आज का युवा और समझदार हिंदू इस तरह की राजनीति को नकार चुका है।

 

इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर एक निर्वाचित महिला सांसद को सार्वजनिक मंच पर इस तरह निशाना बनाया जा सकता है, तो आम महिलाओं के प्रति समाज का रवैया कितना गैरजिम्मेदार हो सकता है। राणा का कथित “हास्य” भरा निकाह प्रस्ताव महिलाओं के गरिमामय स्थान पर सीधा हमला है।

 

यह पहली बार नहीं है जब सांसद इकरा हसन को किसी सरकारी अधिकारी या राजनीतिक विरोधियों से अपमानित होने का अनुभव हुआ हो। कुछ दिन पहले ही उन्होंने सहारनपुर के ADM संतोष बहादुर सिंह पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन के साथ ADM से मिलने की कोशिश की, लेकिन अधिकारी ने उन्हें लंच का बहाना बनाकर तीन घंटे तक इंतजार कराया और बाद में अभद्र भाषा का प्रयोग कर उन्हें दफ्तर से बाहर निकालने की बात की।

ADM संतोष बहादुर सिंह ने हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक “राजनीतिक स्टंट” है, लेकिन सांसद इकरा ने जवाब में कहा कि वो एक साल से किसी अधिकारी की शिकायत नहीं कर रही थीं, पर जब बात आत्मसम्मान की हो, तो चुप रहना भी अपराध है।

 

योगेंद्र राणा का विवादित बयान इस बात का प्रतीक है कि किस तरह राजनीति के कुछ चेहरे सामाजिक मर्यादाओं और महिला सम्मान की सीमाएं पार कर रहे हैं। सोशल मीडिया का इस्तेमाल सार्वजनिक मंच के रूप में होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत और साम्प्रदायिक टिप्पणियों का अखाड़ा बनने के लिए।

इस मामले ने न सिर्फ महिला सांसदों के प्रति समाज की सोच को उजागर किया है, बल्कि यह भी बताया कि आज भी कुछ लोग महिला सशक्तिकरण को लेकर कितने असहज हैं। अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, और क्या इस बयानबाज़ी की ज़िम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।

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