पंजाब विधानसभा सत्र में हुआ भारी बवालपंजाब विधानसभा सत्र में हुआ भारी बवाल

पंजाब विधानसभा सत्र में हुआ भारी बवाल

 

पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र मंगलवार को भारी हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर “वीबी-जी राम जी” किए जाने के फैसले के खिलाफ सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने इस फैसले के विरोध में प्रस्ताव पेश किया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए

नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सत्र की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि, जब हर बार ऐसे सत्रों से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तो इन्हें “स्पेशल सेशन” क्यों कहा जाता है। बाजवा ने आरोप लगाया कि, सरकार ड्रामेबाज़ी कर रही है और पंजाब के खजाने का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।

इसी दौरान सदन में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सुक्खी को बोलने का समय दिया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि सुक्खी किस पार्टी की ओर से बोल रहे हैं। बाजवा ने आशंका जताई कि, कहीं विपक्ष का समय सत्तापक्ष के खाते में न जोड़ दिया जाए। इस पर डिप्टी स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि, विधायक की पार्टी से ज्यादा ज़रूरी उनकी बात है

AAP के मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि, कांग्रेस में विधायक संदीप जाखड़ की जो स्थिति है, वही डॉ. सुक्खी की है। इसके बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा खड़े हुए और कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, जब कोई गरीब तबके से आने वाला विधायक अपनी बात रखता है, तो कांग्रेस को तकलीफ होती है।

इसी बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पंजाब सरकार पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक माहौल और गरमा दिया। शिवराज ने दावा किया कि, पंजाब में मनरेगा के तहत ₹10,653 करोड़ का घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि, सड़कों और नहरों की सफाई जैसे कार्यों में मनरेगा के पैसों का दुरुपयोग किया गया, ओवर-एस्टिमेट बनाए गए और जांच के बावजूद न तो वसूली हुई और न ही दोषियों पर कार्रवाई।

शिवराज ने ये भी कहा कि, पंजाब विधानसभा में जिस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, वो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। केंद्रीय टीम ने जांच कर वसूली की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उस पर कोई कदम नहीं उठाया।

सत्र की शुरुआत में 4 साहिबजादों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई। दिन के अंत में मनरेगा से जुड़े प्रस्ताव को सदन में पेश किया जाना तय किया गया, जिसमें मांग की गई कि, ये योजना 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित रहे और 100 दिन के रोजगार के अधिकार को बरकरार रखा जाए।

सदन में एक और रोचक घटनाक्रम उस वक्त सामने आया, जब BJP विधायक अश्वनी शर्मा बिना सिर ढके बोलने खड़े हुए। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उन्हें टोका, जिसके बाद अश्वनी शर्मा ने सिर पर रूमाल रखकर अपनी बात रखी।
BJP और AAP के बीच “वीर बाल दिवस” के नाम को लेकर भी तीखी नोकझोंक हुई।

अमन अरोड़ा ने सवाल उठाया कि, साहिबजादों की शहादत दिवस का नाम बदलने का फैसला किसके कहने पर हुआ। इस पर अश्वनी शर्मा ने जवाब देने से बचते हुए कहा कि, सोशल मीडिया पर सारी जानकारी मौजूद है।

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि, मनरेगा के तहत पंजाब में औसतन केवल 26 से 27 दिन का रोजगार ही मिल पाया है, जबकि केंद्र सरकार 100 या 125 दिन रोजगार देने की बात कर रही है। वहीं AAP विधायकों ने इसे राज्यों के अधिकारों पर हमला और संघीय ढांचे को कमजोर करने की साजिश करार दिया।

सत्र के दौरान ये साफ नजर आया कि, मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि आने वाले समय में केंद्र बनाम राज्य, गरीब बनाम सत्ता और संविधान बनाम राजनीतिक फैसलों की बड़ी लड़ाई का प्रतीक बनती जा रही है।