हिमाचल प्रदेश के CM सुक्खू का सख्त निर्देश
हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन के मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा सदन में स्पष्ट किया कि, इस गोरखधंधे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, सरकार सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीएम ने कहा कि पुलिस और प्रशासन पूरी निष्पक्षता से जांच कर रहे हैं और ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। दोषियों पर कानून की सख्त धाराएं लागू की जाएंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, नदियों और खनिज संसाधनों की सुरक्षा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दरअसल सुजानपुर में अवैध खनन का बड़ा मामला सामने आया है। जिसको लेकर CM सुक्खू ने सदन में जानकारी दी कि, पुलिस को हाल ही में सूत्रों से सूचना मिली थी कि सुजानपुर क्षेत्र में एक स्टोन क्रेशर, जिसे जुलाई 2024 में आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था, अभी भी चोरी-छिपे काम कर रहा है।
सूचना के आधार पर 12 अगस्त 2025 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में छापेमारी की गई। भारी बारिश और टूटी-फूटी सड़कों के बावजूद टीम मौके तक पहुंची और वहां से भारी मात्रा में अवैध खनन सामग्री और मशीनरी जब्त की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक पोकलेन मशीन, दो जेसीबी, चार टिपर ट्रक, एक मिक्सर, लगभग 50 टिपर खनिज सामग्री से भरे हुए, एक ट्रैक्टर और क्रेशर परिसर का डीवीआर सिस्टम कब्जे में लिया।
सीएम ने कहा कि इस मामले में जो FIR दर्ज हुई है, वे चोरी और अवैध खनन से संबंधित गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
बरसात के मौसम में जब खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, उस दौरान भी यहां जेसीबी और टिपरों से खनन जारी रहा। जांच में ये भी सामने आया कि क्रेशर की लीज सरकारी भूमि पर थी और 15 मार्च 2024 से क्रेशर को आधिकारिक तौर पर बंद घोषित किया जा चुका था, इसके बावजूद यहां गैरकानूनी खनन चलता रहा है।
बैंक खाते और माइनिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे है। सरकार ने जांच को गहराई तक ले जाते हुए लोक निर्माण विभाग से खनिज सामग्री का मापन कराया है। साथ ही खनन विभाग को रॉयल्टी और दस्तावेजों की जांच के लिए शामिल किया गया है। आरोपियों के बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल हो रही है।
जब्त किए गए डीवीआर की रिकॉर्डिंग को आरएफएसएल जुन्गा भेजा गया है ताकि ये पता चल सके कि खनन कब और किस स्तर पर हो रहा था। वहीं, बिजली बोर्ड ने क्रेशर की सप्लाई काट दी है ताकि दोबारा अवैध गतिविधि न हो सके।
सुक्खू ने सदन में खुलासा किया कि क्रेशर मालिक ने 4 नवंबर 2024 को अपने भतीजे उमेश शर्मा को पॉवर ऑफ अटॉर्नी देकर पूरे संचालन की जिम्मेदारी उसके हाथ में दे दी थी। उमेश शर्मा सड़क और पुल बनाने वाली एक निर्माण कंपनी का मालिक है। अब जांच इस बात की भी हो रही है कि उसकी कंपनी को महावीर स्टोन क्रेशर से सड़क निर्माण के लिए कितनी सामग्री सप्लाई की गई।
सीएम ने कहा, “यहां नाम किसी और का है, लेकिन खेल कोई और खेल रहा है। यही असलियत है इस गैरकानूनी कारोबार की।” अग्रिम जमानत की कोशिश मुख्यमंत्री ने ये भी बताया कि प्रवीण शर्मा, उसका भतीजा उमेश शर्मा और उनके सहयोगी—सतीश शर्मा और संजय कुमार—ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है।
इस पर सुनवाई 24 सितंबर को होनी है। सीएम ने स्पष्ट किया कि जमानत का मतलब दोषमुक्त होना नहीं है। जांच लगातार जारी है और सरकार का मकसद है कि सभी आरोपी अदालत के कटघरे तक पहुंचें।
सरकार का मकसद जनता के अधिकारों की रक्षा करना है।
सीएम ने विश्वास दिलाया कि इस पूरे मामले की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से होगी। दोषियों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों को अवैध खनन से बचाया जाए और जनता के अधिकार सुरक्षित रहें।
ये केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय अपराध भी है।”हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। सुजानपुर में पकड़ा गया ये मामला एक बड़ा उदाहरण है कि किस तरह रसूखदार लोग कानून की धज्जियां उड़ाकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।
सीएम सुक्खू का ये सख्त संदेश साफ करता है कि सरकार इस बार किसी भी दबाव या सिफारिश में आने वाली नहीं है। अब देखना ये होगा कि जांच कितनी तेजी और निष्पक्षता से आगे बढ़ती है और क्या वाकई दोषी जेल तक पहुंचते हैं।

