नई दिल्ली
अगर आप नौकरी करते हैं और हर महीने आपकी सैलरी से पीएफ कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। ईपीएफओ ने पीएफ से पैसा निकालने के नियमों में बदलाव करते हुए कर्मचारियों के लिए निकासी को आसान किया है। अब जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा रकम का एक बड़ा हिस्सा निकाल सकते हैं। खासकर नौकरी छूटने, बीमारी, पढ़ाई, घर और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए पीएफ का पैसा पहले के मुकाबले आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में ईपीएफ निकासी के नए नियमों की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक कर्मचारियों को आंशिक निकासी और एडवांस के नियमों को आसान और ज्यादा लचीला बनाया गया है।
नौकरी चली गई तो पीएफ का 75% निकाल सकेंगे
सबसे बड़ी राहत उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी नौकरी चली जाती है। बेरोजगारी की स्थिति में कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक तुरंत निकाल सकते हैं। यानी नौकरी जाने के बाद पैसों की जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस बदलाव का मकसद बेरोजगार कर्मचारियों को आर्थिक मदद देना है, ताकि नई नौकरी मिलने तक उन्हें पैसों की परेशानी का सामना न करना पड़े।
साल में दो बार निकाल सकेंगे 75% तक रकम
ईपीएफओ के नए नियमों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा रकम का 75 फीसदी तक साल में दो बार निकाल सकते हैं। इसके लिए तीन केटेगरी बनाई गई हैं। इसमें जरूरी खर्च, घर से जुड़ी जरूरत और खास परिस्थितियां शामिल है। यानी मेडिकल इमरजेंसी, एजुकेशन, घर और पैसे से जुड़ी बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक सहारा बन सकता है।
बीमारी के लिए निकासी की कोई लिमिट नहीं
ईपीएफ से एडवांस निकालने के नियमों में बीमारी को भी शामिल किया गया है। बीमारी के मामले में एडवांस निकालने की संख्या पर कोई लिमिट नहीं रखी गई है। इससे कर्मचारी और उनके परिवार को मेडिकल खर्च के समय पीएफ की रकम का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
पढ़ाई और शादी के लिए भी पीएफ का पैसा
नए नियमों के तहत कर्मचारी अपनी पीएफ सदस्यता के दौरान एजुकेशन के लिए अधिकतम 10 बार और शादी के लिए अधिकतम 5 बार पीएफ एडवांस ले सकते हैं। वहीं, घर से जुड़ी जरूरतों के लिए पीएफ एडवांस अधिकतम 5 बार लिया जा सकता है। इन आंशिक निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की पीएफ सदस्यता जरूरी होगी।
7 साल की जगह 12 महीने की सदस्यता
कर्मचारियों के लिए एक और बड़ा बदलाव न्यूनतम सर्विस पीरियड को लेकर है। कई तरह के पीएफ एडवांस निकासी के लिए पहले लंबे सर्विस पीरियड की जरूरत होती थी। अब कुछ मामलों में यह पीरियड घटाकर 12 महीने कर दिया गया है। इसका फायदा खासतौर पर उन युवा कर्मचारियों को मिल सकता है, जिन्हें नौकरी शुरू करने के कुछ समय बाद ही किसी जरूरी खर्च के लिए पैसों की जरूरत पड़ जाती है।
EPS का पैसा निकालने के नियम अलग
सरकार ने यह भी साफ किया है कि समय से पहले अंतिम ईपीएफ सेटलमेंट के लिए 12 महीने का वेटिंग पीरियड और कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के निकासी फायदे के लिए 36 महीने का वेटिंग पीरियड लागू है।
॥ दोहा ॥ बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार । ध्यान धरत ही होत नर दुःख…
॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ ॥…
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