हरियाणा में खेती की जमीन पर लगेगा डेवलपमेंट चार्ज
हरियाणा सरकार अब उन किसानों और जमीन मालिकों पर भी अतिरिक्त बोझ डालने जा रही है, जो अपनी कृषि भूमि पर कोई कॉमर्शियल प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULB) ने एक अहम प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके मुताबिक शहरों के आसपास स्थित कृषि भूमि पर भी एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज वसूला जाएगा।
अभी तक EDC केवल नगर निगम, नगर परिषद और पालिका की सीमा के अंदर आने वाले इलाकों की जमीनों पर ही लगता था। लेकिन प्रस्ताव पास होने के बाद पेट्रोल पंप, स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर या अन्य कॉमर्शियल गतिविधियों पर भी ये शुल्क देना होगा। यानी, अगर कोई किसान अपनी खेत वाली जमीन पर छोटा स्कूल खोलना चाहता है तो उसे CLU चार्ज के साथ-साथ EDC भी चुकाना पड़ेगा।
EDC का मतलब है कि, एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज। ये शुल्क सरकार बिल्डरों या कॉमर्शियल गतिविधियों से इसलिए लेती है ताकि इलाके की बाहरी सुविधाएं जैसे सड़कें, सीवर, पानी की लाइन, बिजली, पार्क और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी तैयार की जा सकें।
रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डर ये चार्ज ग्राहकों से वसूलते हैं। वे पहले सरकार से तय दर लेते हैं और फिर उसे प्रति वर्ग फुट में बांटकर लोगों पर डालते हैं।
मान लीजिए आपका प्लॉट 1,000 वर्ग फुट का है और FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) 3 है। इसका मतलब आप 3,000 वर्ग फुट तक निर्माण कर सकते हैं। अगर सरकार ने 500 रुपये प्रति वर्ग फुट का EDC तय किया है, तो आपको 3,000 × 500 = 15 लाख रुपये सिर्फ EDC के रूप में देने होंगे।
यानी, आपके प्रोजेक्ट की लागत पर सीधा असर पड़ता है। यही कारण है कि, किसान से लेकर बिल्डर और खरीदार तक, सभी पर इस नए प्रस्ताव का दबाव महसूस होगा।
हरियाणा में EDC की कोई एक फिक्स रेट नहीं है। ये प्रोजेक्ट और इलाके के आधार पर अलग-अलग होता है। दिसंबर 2024 में सरकार ने संभावित रियल एस्टेट इलाकों के लिए EDC दरों में 20% की बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा अब हर साल 10% की स्वतः वृद्धि का प्रावधान कर दिया गया है।
अगर इस साल 500 रुपये प्रति वर्ग फुट EDC है, तो अगले साल यह 550 रुपये हो जाएगा, और उसके अगले साल 605 रुपये। लंबे समय में ये चार्ज बहुत बड़ा बोझ बन सकता है।
डेवलपर्स का कहना है कि, सरकार ने अब तक जिस इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने का वादा किया था, उसका काम अधूरा है। जबकि EDC से अब तक हजारों करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। ऐसे में ये कदम रियल एस्टेट और कॉमर्शियल गतिविधियों को महंगा और मुश्किल बना देगा।
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NREDC) के अध्यक्ष प्रवीन जैन ने कहा कि, इस फैसले से प्रॉपर्टी के दाम और बढ़ जाएंगे। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में पहले से ही सर्कल रेट्स ऊंचे हैं।
उन्होंने कहा कि, 2015-16 में जब सरकार ने EDC बढ़ाया था, तब डेवलपर्स ने लाइसेंस लेना बंद कर दिया था। अब नए प्रस्ताव के बाद किसानों और जमीन मालिकों के लिए भी कॉमर्शियल लाइसेंस लेना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
इस का सबसे बड़ा असर ये रहेंगा कि, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोलना महंगा हो जाएगा। पेट्रोल पंप और वेयरहाउस जैसी जरूरत की सुविधाओं की लागत बढ़ जाएगी। किसान अगर जमीन का वैकल्पिक इस्तेमाल करना चाहेंगे तो उन्हें ज्यादा चार्ज चुकाना पड़ेगा।
शहरों में प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट के दाम और ऊपर जाएंगे।ऐसे में विशेषज्ञों की माने तो, सरकार का ये कदम राजस्व तो बढ़ाएगा, लेकिन इससे निवेशक और किसान दोनों परेशान होंगे।
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