भारत के लिए साल 2026 मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। दुनिया की प्रमुख मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में अल-नीनो तेजी से सक्रिय हो रहा है, जिसका असर भारत के मॉनसून, तापमान और खेती-किसानी पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अल-नीनो के प्रभाव से इस साल कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इसके साथ ही लंबे समय तक चलने वाली लू और भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में अक्सर अल-नीनो के दौरान मॉनसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होती है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त के दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम रह सकती है। उत्तर भारत, पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही कई इलाकों में बारिश की कमी दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में अल-नीनो का असर मॉनसून को और कमजोर कर सकता है।
अल-नीनो का असर सिर्फ बारिश पर ही नहीं बल्कि तापमान पर भी पड़ता है। अनुमान है कि देश के उत्तरी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले ही तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। आने वाले महीनों में लू की अवधि और तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ सकता है। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। विशेषज्ञ किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलों और वैकल्पिक खेती के विकल्प अपनाने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही जल संरक्षण और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
अगर बारिश कम होती है तो जलाशयों और बांधों में पानी का स्तर घट सकता है। इसका असर पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और कृषि दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित सूखे और गर्मी से निपटने के लिए अभी से तैयारी जरूरी है। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, फसल बीमा और किसानों को समय पर सहायता जैसे कदम नुकसान को कम कर सकते हैं। आम लोगों को भी पानी की बचत करने, गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ महीने यह तय करेंगे कि अल-नीनो का असर कितना गंभीर होगा। यदि समय रहते तैयारी कर ली गई तो इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन यदि मॉनसून कमजोर रहा तो देश को गर्मी, सूखे और कृषि संकट जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर और डीग जिलों में एक बार फिर जाट आरक्षण का मुद्दा…
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में…
देशभर में मॉनसून लगातार आगे बढ़ रहा है और अब लोगों की नजरें दिल्ली पर…
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) 23 जून 2026 को नई दिल्ली…
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई पर पड़ने वाले असर को देखते हुए…
झारखंड के लोहरदगा जिले से पुलिस की संवेदनशीलता और मानवता की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने…