Corruption spread from Kanpur to Mainpuri: कानपुर से मैनपुरी तक फैले भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पर्दाफाशCorruption spread from Kanpur to Mainpuri: कानपुर से मैनपुरी तक फैले भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पर्दाफाश

Corruption spread from Kanpur to Mainpuri: कानपुर से मैनपुरी तक फैले भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पर्दाफाश

कानपुर से लेकर मैनपुरी तक फैले एक बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। चर्चित वकील अखिलेश दुबे के करीबी माने जाने वाले पुलिस अधिकारी, सर्किल ऑफिसर (CO) ऋषिकांत शुक्ला पर गंभीर आरोपों के बाद शासन ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि शुक्ला ने कानपुर में एक संगठित गिरोह बनाकर अवैध संपत्तियां अर्जित कीं और निर्दोष नागरिकों को फर्जी मुकदमों में फंसाया।

एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकांत शुक्ला ने कानपुर के चर्चित वकील अखिलेश दुबे और उनके साथियों के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर लोगों को धमकाता था, उनकी जमीनें कब्जे में लेता था और मोटी रकम की वसूली करता था।

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुक्ला के करीबी कई अधिकारी कानपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (केडीए) और पुलिस विभाग में पदस्थ थे, जो इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण देते थे।

ऋषिकांत शुक्ला फिलहाल मैनपुरी के भोगांव क्षेत्र में तैनात थे, लेकिन उनका ‘भ्रष्टाचार नेटवर्क’ मुख्य रूप से कानपुर में सक्रिय था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वे 1998 से 2006 और फिर दिसंबर 2006 से 2009 तक कानपुर में तैनात रहे। इन्हीं वर्षों में उनके खिलाफ कई शिकायतें भी दर्ज हुईं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी।

जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी अवधि में उन्होंने वकील अखिलेश दुबे के साथ मिलकर कई लोगों की संपत्तियों पर कब्जा किया और कुछ मामलों में दबाव बनाकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए।

एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऋषिकांत शुक्ला और उनके परिवार, सहयोगियों तथा साझेदारों के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों का पता चला है। इनमें से 92 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 12 संपत्तियों की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि तीन और संपत्तियों की जांच जारी है।

इन संपत्तियों में कानपुर, लखनऊ, उन्नाव और मैनपुरी में स्थित प्लॉट, फ्लैट, दुकानें और कृषि भूमि शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कानपुर के आर्यनगर इलाके में स्थित 11 दुकानें शुक्ला के सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर दर्ज हैं, जिन्हें जांच एजेंसियां शुक्ला की बेनामी संपत्ति मान रही हैं।

विजिलेंस विभाग की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन संपत्तियों की खरीदारी शुक्ला के पैन कार्ड से जुड़े बैंक खातों से हुई थी। इसके अलावा, कई खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन और भारी नकद जमा पाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अब इन बैंक खातों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुलिस कमिश्नरेट की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकांत शुक्ला और अखिलेश दुबे की साझेदारी केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं थी। दोनों ने मिलकर ब्लैकमेलिंग, वसूली और कब्जे का एक संगठित रैकेट तैयार किया था। कई मामलों में यह गिरोह उन लोगों को निशाना बनाता था जो आर्थिक रूप से कमजोर थे या जिनके खिलाफ आसानी से फर्जी केस दर्ज किए जा सकते थे। ऐसे लोगों से जमीन और संपत्ति के दस्तावेज हड़पकर गिरोह ने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की।

सोमवार को प्रमुख सचिव के माध्यम से शासन ने ऋषिकांत शुक्ला के निलंबन का आदेश जारी किया। इससे पहले कानपुर पुलिस कमिश्नर ने 10 और 15 सितंबर को इस मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट एडीजी (प्रशासन) को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर 18 सितंबर को शासन स्तर पर निर्णय लिया गया और विजिलेंस को स्वतंत्र जांच का जिम्मा सौंपा गया।

कानपुर पुलिस और विजिलेंस विभाग की संयुक्त जांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शुक्ला और दुबे गिरोह ने किन-किन मामलों में फर्जी मुकदमे दर्ज कराए और किन निर्दोष लोगों को इसका शिकार बनाया। अब यह मामला प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई का एक अहम उदाहरण बन गया है, जिसमें पुलिस और वकीलों की सांठगांठ से पनपे रैकेट का खुलासा हुआ है।

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