उत्तर प्रदेश

CM Yogi took out unity march: गोरखपुर में CM योगी ने निकाली एकता यात्रा, प्रदेशभर में राष्ट्रीय एकता का दिया संदेश, बोले CM- “कोई नया जिन्ना पैदा न हो पाएं”

CM Yogi took out unity march: गोरखपुर में CM योगी ने निकाली एकता यात्रा

 

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में एकता यात्रा निकालकर प्रदेशभर में राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया। यह यात्रा लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगभग दो किलोमीटर तक पैदल चले और इस दौरान उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे। यात्रा के दौरान पूरे रास्ते में देशभक्ति के नारे गूंजते रहे और लोगों ने पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

सीएम योगी ने टाउनहाल स्थित महात्मा गांधी और रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर यात्रा की शुरुआत की। वहां से वह गोलघर स्थित काली मंदिर तक पैदल पहुंचे। रास्ते भर लोगों का उत्साह देखने लायक था। काली मंदिर पहुंचकर उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ी और लगभग दस किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गीता वाटिका के पास विष्णुंबर पाठक पार्क में संपन्न हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर संबोधन करते हुए कहा कि एकता यात्रा केवल कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने जिस एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना की थी, उसे मजबूत करने के लिए यह पदयात्रा निकाली जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 25 नवंबर तक 10 किलोमीटर लंबी ऐसी यात्राएं आयोजित की जाएंगी, ताकि लोगों में एकता का संदेश पहुंचे और युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जागृत हो।

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज जब “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, तब कुछ लोगों को इससे दिक्कत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “आज जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर कार्यक्रम शुरू हुए तो सिर फूटना शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने इसका विरोध किया। ये वही लोग हैं जो सरदार पटेल की जयंती पर कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते, लेकिन जिन्ना को सम्मान देने के कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं।”

उन्होंने कहा कि यही मानसिकता देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी उग्रवाद, आतंकवाद और नक्सलवाद देश की एकता को चुनौती दे रहे हैं और जो भी क्रांतिकारियों या राष्ट्रनायकों का अपमान करते हैं, वे इन अलगाववादी ताकतों को बल देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, क्षेत्र या भाषा के नाम पर बांटने की कोशिश करने वालों को पहचानना होगा।

सीएम योगी ने तीखे शब्दों में कहा कि ऐसे तत्व “नए जिन्ना” पैदा करने की साजिश में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें याद रखना होगा कि भारत के अंदर कोई नया जिन्ना पैदा न हो पाए। अगर कोई जिन्ना बनने की कोशिश करता है, तो उसे विचारधारा के स्तर पर दफन कर देना होगा। भारत के हर नागरिक को एकजुट होकर खड़ा होना होगा ताकि देश की एकता अक्षुण्ण बनी रहे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर स्कूल में “वंदे मातरम्” का गायन अनिवार्य होना चाहिए और विद्यार्थियों को सरदार पटेल जैसे महापुरुषों के योगदान पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने “वंदे मातरम्” को साम्प्रदायिक बताकर संशोधित करने का प्रयास किया। यही तुष्टिकरण की नीति थी जिसने 1947 में देश के विभाजन को जन्म दिया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “वंदे मातरम्” वह मंत्र था जिसने भारत को विदेशी दासता से मुक्त होने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने इस गीत को भी साम्प्रदायिक बताकर संशोधित करना चाहा। कोई भी व्यक्ति या संस्था राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती। कुछ लोगों के लिए व्यक्तिगत आस्था देश से बड़ी हो जाती है, और यही सोच विभाजन की जड़ बनी।”

मुख्यमंत्री ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1923 में जब मोहम्मद अली जौहर कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने “वंदे मातरम्” गाए जाने का विरोध किया और अधिवेशन की अध्यक्षता छोड़ दी थी। योगी ने कहा कि वही मानसिकता आज भी कुछ नेताओं में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत में जो भी रहेगा, उसे देश की एकता और अखंडता के लिए काम करना होगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि अगर सरदार पटेल न होते, तो आज भारत अनेक हिस्सों में बंटा होता। उन्होंने कहा कि पटेल ने 562 रियासतों को एकसूत्र में पिरोकर भारत को अखंड बनाया। योगी ने कहा कि आज देश को उसी एकता की भावना को फिर से जीवंत करने की आवश्यकता है।

Kirti Bhardwaj

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