उत्तर प्रदेश

CM YOGI आदित्यनाथ ने दिखाई सख्ती, स्कॉलरशिप वितरण में पाई गई थी लापरवाही,100 से अधिक अधिकारी किए गए है चिह्नित

CM YOGI आदित्यनाथ ने दिखाई सख्ती

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि, पढ़ने-लिखने वाले बच्चों के हितों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक व्यवस्था में शिथिलता और जवाबदेही की कमी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप और शुल्क प्रतिपूर्ति में अनियमितताओं और देरी की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं में कई जिलों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में यह पाया गया कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने जानबूझकर या उदासीनता के चलते छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया में देरी की। इस लापरवाही का सीधा असर हजारों छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ा, जिससे सरकार की योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़े हुए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया और एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी छात्रों को मिलने वाले लाभों में अड़चन पैदा करता है या जानबूझकर देरी करता है, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभागीय जांच की गई, जिसमें 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया। इनमें से 14 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रतिकूल प्रविष्टि (एडवर्स एंट्री) दी गई है, जो उनके सेवा रिकॉर्ड पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी और भविष्य में उनके प्रोन्नति एवं पदस्थापन को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, शेष अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है और उनकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की स्कॉलरशिप योजना का उद्देश्य SC, ST और OBC वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति और वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे वे बिना किसी आर्थिक बोझ के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। यह योजना सामाजिक समावेशन और समानता की दिशा में एक अहम पहल है। लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में जब लापरवाही सामने आती है, तो इसका असर सीधे उन छात्रों पर पड़ता है जो पहले से ही सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे होते हैं।

राज्य सरकार को कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिली थीं कि स्कॉलरशिप की राशि समय पर छात्रों के खातों में नहीं पहुंच रही है। कुछ मामलों में तो छात्रों को कई महीनों तक अपनी स्कॉलरशिप के लिए इंतजार करना पड़ा। इससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित हुई बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ा। सरकार ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और सभी जिलों से रिपोर्ट तलब की। जांच में यह सामने आया कि कई अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनुचित देरी की, जिससे समयबद्ध वितरण प्रभावित हुआ।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो भी अधिकारी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की कोई भी शिकायत न आए, इसके लिए पूरी प्रणाली को पारदर्शी, समयबद्ध और उत्तरदायी बनाया जाए। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि छात्रवृत्ति वितरण की पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी सहायता लेकर प्रणाली को और अधिक दक्ष बनाया जाए।

इसके साथ ही राज्य सरकार अब ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दे रही है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग को निर्देशित किया गया है कि वह हर महीने छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप की समीक्षा रिपोर्ट तैयार करे और मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि छात्रों से संबंधित किसी भी शिकायत का निपटारा 7 कार्यदिवसों के भीतर हो।

इस सख्त कदम से यह संकेत स्पष्ट है कि योगी सरकार छात्रों के शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार चाहती है कि कोई भी पात्र छात्र केवल व्यवस्था की खामियों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री का यह संदेश प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि जनकल्याण की योजनाओं में लापरवाही की गई, तो कठोर कार्रवाई तय है।

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