BLO Sarvesh Singh in Moradabad: मुरादाबाद में BLO सर्वेश सिंह का आखिरी वीडियो हुआ वायरलBLO Sarvesh Singh in Moradabad: मुरादाबाद में BLO सर्वेश सिंह का आखिरी वीडियो हुआ वायरल

BLO Sarvesh Singh in Moradabad: मुरादाबाद में BLO सर्वेश सिंह का आखिरी वीडियो हुआ वायरल

मुरादाबाद में रविवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने एक परिवार ही नहीं, पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया. यह सुबह हर दिन की तरह ही शुरू हुई थी. BLO सर्वेश सिंह के घर में बच्चे और परिजन दिनचर्या की ओर बढ़ रहे थे. लेकिन घर का एक कमरा, जिसमें सर्वेश सिंह थे, असामान्य रूप से देर तक बंद रहा. परिवार ने कई बार आवाज दी, दरवाजा खटखटाया, मगर अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. धीरे-धीरे चिंता ने भय का रूप ले लिया और अंततः दरवाजा तोड़ा गया.

अंदर का दृश्य देखकर परिवार की दुनिया ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. BLO सर्वेश सिंह ने अपनी जान दे दी थी.

46 वर्षीय सर्वेश सिंह कंपोजिट स्कूल जाहिदपुर सिकंदरपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत थे और पिछले कुछ समय से उन्हें बीएलओ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. चार बेटियों के पिता सर्वेश लंबे समय से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्य में व्यस्त थे. उनकी ड्यूटी लगातार बढ़ रही थी और काम का दबाव भी. घटना के बाद उनके कमरे से तीन पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने SIR के काम से जुड़े अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव का विस्तार से उल्लेख किया है.

इसके बाद एक वीडियो भी सामने आया, जो दावा किया जा रहा है कि सर्वेश ने जान देने से पहले रिकॉर्ड किया था. वीडियो में सर्वेश रोते हुए, टूटे हुए शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं. उनकी आवाज में हताशा साफ सुनाई देती है. उन्होंने कहा, “काम का दबाव बहुत ज्यादा है. ना मैं सो पा रहा हूं, ना काम कर पा रहा हूं. मम्मी मेरी चार बच्चों का ध्यान रखना. मैं जीना चाहता हूं, लेकिन दबाव बहुत है.”

उन्होंने भावुक होते हुए अपनी पत्नी और परिवार से माफी भी मांगी. वीडियो में सर्वेश कहते नजर आते हैं कि काश वे काम में इतने सक्षम होते कि लक्ष्य को पूरा कर पाते, लेकिन वे असहाय महसूस कर रहे थे.
घटना के बाद मिले दो पन्नों के सुसाइड नोट ने स्थिति को और स्पष्ट कर दिया. नोट बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम लिखा गया था.

इसमें उन्होंने बताया कि दिन-रात लगातार काम करने के बावजूद वे SIR का लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रहे थे. मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा था और रातें चिंता में गुजर रही थीं. उन्होंने लिखा, “रात-दिन काम करता रहा, फिर भी SIR का टारगेट हासिल नहीं कर पा रहा हूं. रात बहुत मुश्किल और चिंता में कटती है. सिर्फ दो-तीन घंटे ही सो पा रहा हूं. मेरी चार बेटियां हैं, जिनमें से दो की तबीयत खराब है. मुझे क्षमा करें.”

परिवार के सदस्यों का कहना है कि कई दिनों से सर्वेश की स्थिति ठीक नहीं थी. वे हर रात देर तक जागते, कागजी काम पूरा करते और सुबह फिर जल्दी उठकर स्कूल व BLO की ड्यूटी संभालने निकल जाते. उनकी दिनचर्या में आराम लगभग खत्म हो गया था. परिजनों के अनुसार, बार-बार होने वाले सर्वे, मोबाइल ऐप पर अपडेट, रिपोर्टिंग और निर्धारित लक्ष्य को लेकर अधिकारियों द्वारा किए जा रहे दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद कमजोर कर दिया था. कई दिनों से उनकी नींद पूरी नहीं हो रही थी और वे तनाव में रहने लगे थे.

परिवार ने आरोप लगाया है कि जो अधिकारी काम का असामान्य दबाव डाल रहे थे, उन्हीं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. परिजनों की मांग है कि ऐसी कार्यप्रणाली पर रोक लगे, जिसमें एक कर्मचारी पर इतना काम डाल दिया जाए कि वह मानसिक संतुलन खो बैठे. परिवार ने यह भी कहा कि सर्वेश अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले, शांत और मेहनती व्यक्ति थे. लेकिन लगातार काम का बोझ उन्हें धीरे-धीरे अंदर से खत्म कर रहा था.

स्थानीय लोगों और सहकर्मियों का कहना है कि सर्वेश सिंह हमेशा शांत, मिलनसार और अपने काम के प्रति समर्पित रहते थे. लेकिन हाल के दिनों में वे तनाव में दिखने लगे थे. कई बार उन्होंने सहकर्मियों से भी कहा था कि SIR का काम बहुत ज्यादा है और वे इसे पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं.

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस समय BLOs पर काम का बोझ काफी बढ़ा हुआ है. चुनावी प्रक्रिया के तहत कई प्रकार के सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और फील्ड वर्क की जिम्मेदारियां एक साथ आती हैं, जिससे कर्मचारियों पर काफी दबाव बढ़ जाता है. कई शिक्षक पहले भी चुनावी कार्यों में अत्यधिक बोझ को लेकर आवाज उठाते रहे हैं.