करण भूषण सिंह को कैसरगंज से BJP ने बनाया उम्मीदवार, बृजभूषण का पत्ता साफ…

लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश से दो और उम्मीदवारों की सूची जारी की है। कैसरगंज से भाजपा के मौजूदा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काटकर पार्टी ने उनके छोटे बेटे करण भूषण सिंह को वहां से उम्मीदवार बनाया है। इनके अलावा रायबरेली सीट से दिनेश प्रताप सिंह को कैंडिडेट बनाया गया है। दिनेश सिंह पहले भी रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

बता दें कि महिला पहलवानों के कथित यौन शोषण के आरोपों के बाद से भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह विवादों में रहे हैं। इस विवाद का असर उनकी राजनीतिक यात्रा पर भी दिखा है। इसी वजह से भाजपा ने अब उनकी जगह उनके बेटे को कैसरगंज से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

बृजभूषण शरण सिंह के बेटे करण भूषण सिंह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। उन्हें इसी साल फरवरी में यूपी कुश्ती संघ का अध्यक्ष चुना गया था। वह डबल ट्रैप शूटिंग के भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने अवध यूनिवर्सिटी से बीबीए और एलएलबी किया है। इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा की डिग्री भी ली है। करण भूषण इसके अलावा सहकारी ग्राम विकास बैंक (नवाबगंज, गोण्डा) के अध्यक्ष भी हैं।

हालांकि, करण को कैसरगंज से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बृजभूषण शरण सिंह की बात पहले ही हो चुकी थी। सिर्फ इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी था। यह करण का पहला चुनाव होगा। इससे पहले उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण को भाजपा विधानसभा चुनाव में टिकट दे चुकी है। वह भाजपा के विधायक हैं। माना जा रहा है कि करण सिंह शुक्रवार 3 मई को नामांकन दाखिल करेंगे। गोंडा और कैसरगंज में शुक्रवार को नामांकन का अंतिम दिन है।

पूर्वांचल की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह की बड़ी धाक रही है। वह अब तक कुल छह कार्यकाल के लिए सांसद चुने जा चुके हैं। इमें गोंडा संसदीय सीट से दो बार, बहराइच से एक बार और कैसरगंज से लगातार तीन बार सांसद रहे हैं। भाजपा से पहले वह समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं। कैसरगंज से पहली बार उन्होंने सपा के ही टिकट पर चुनाव लड़ा था। सिंह ने  अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1991 में राम मंदिर आंदोलन की राजनीति से किया था।

2008 में उन्हें मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर क्रॉस वोटिंग करने के आरोप में भाजपा ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। हालांकि, 2014 में वह फिर से भाजपा में आ गए और भाजपा के टिकट पर ही कैसरगंज से चुनाव जीता था। इससे पहले 2009 में वह सपा के टिकट पर यहां से जीते थे। इस बार महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के चलते पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारने से परहेज कर रही है ताकि विपक्ष को भाजपा पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाने का मौका न मिल सके। हालांकि, उनकी जगह उनके बेटे करण को उतारकर भाजपा विपक्ष के उस आरोप को सच साबित करेगी कि भाजपा भी वंशवादी राजनीति करती है, भले ही इसके लिए वह कांग्रेस पर तोहमत लगाती हो।

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