बिहार

BIHAR: बीजेपी की कमजोरी को दूर करने में जुटे अमित शाह, मिशन 2025 के लिए बनाया ‘शाही’ प्लान !

BIHAR: बीजेपी की कमजोरी को दूर करने में जुटे अमित शाह, मिशन 2025 के लिए बनाया ‘शाही’ प्लान !

अमित शाह की बिहार में मिशन 2025 की रणनीति अब नए मुकाम तक पहुंचती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जेडीयू, संजय कुमार झा और विजय कुमार चौधरी के साथ सीट शेयरिंग और चुनावी समन्वय की कवायद शुरू कर दी है, ताकि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की स्थिति मजबूत की जा सके।

शाह का ताजा दौरा न सिर्फ सियासी महत्व का है, बल्कि रणनीति, संवाद और समन्वय के तीनों मोर्चों पर केंद्रित है, जिनका असर सीधे बिहार के कमजोर गढ़ों, शाहाबाद और मगध क्षेत्र को राजनीतिक तौर पर सशक्त बनाने की दिशा में देखने को मिलेगा।

हाल ही में दिल्ली में अमित शाह ने बिहार बीजेपी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी, जिसमें विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया गया। इंडिया ब्लॉक की एकता को देखते हुए अमित शाह ने बिहार चुनाव की कमान स्वयं संभाली है। टिकट वितरण, फीडबैक सिस्टम और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के जरिए पार्टी की मजबूती पर जोर दिया जा रहा है।

शाह की ओर से 5000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने की प्रक्रिया न केवल चुनावी दिशा तय करेगी, बल्कि टिकट वितरण में भी पारदर्शिता और क्षेत्रीय आधार को प्राथमिकता देगी।

बिहार विधानसभा चुनाव में शाहाबाद और मगध क्षेत्र एनडीए के लिए चिंताजनक रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में शाहाबाद के चार जिलों में एनडीए को कोई सीट नहीं मिली थी। 2020 विधानसभा चुनाव में भी केवल दो सीटें ही मिल सकीं। वाम दलों की चुनौती और स्थानीय विरोध के कारण एनडीए की पकड़ कमजोर रही है। शाह का फोकस इन क्षेत्रों में सांगठनिक शक्ति को बढ़ाने, कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊँचा करने और बूथ स्तर पर मजबूती लाने का है।

अमित शाह के दौरे में दो प्रमुख क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की गई… पहली बैठक रोहतास में, जिसमें कैमूर, आरा, बक्सर, गया पूर्वी, गया पश्चिमी, नवादा, जहानाबाद, अरवल और औरंगाबाद के कार्यकर्ताओं से संवाद और रणनीति पर चर्चा हुई। 50 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस रखा गया।

दूसरी बैठक बेगूसराय के रिफाइनरी टाउनशिप खेल मैदान में हुई, जिसमें पटना ग्रामीण, पटना महानगर, बाढ़, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, खगड़िया और बेगूसराय जिले के कार्यकर्ताओं, नेताओं और पदाधिकारियों से संवाद किया गया। यह बैठक भी 50 विधानसभा सीटों के लिए थी।

शाह दोनों बैठकों में कुल 5000 कार्यकर्ताओं के दो समूहों, 2500-2500 से सीधा संवाद कर रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर की समस्याएं और संभावनाएं सामने आ सकें।

बैठकों में अमित शाह कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावी संघर्ष के राजनीतिक मंत्र दे रहे हैं। विरोधी दलों की एकजुटता को ध्यान में रखते हुए, कार्यकर्ताओं को बताया जा रहा है कि, किस तरह बूथ स्तर पर मजबूत तैयारी और स्थानीय प्रभावशाली नेताओं की सहभागिता से जबरदस्त परिणाम लाए जा सकते हैं। विजय कुमार चौधरी और संजय कुमार झा जैसे जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी इस समन्वय को और धार दे रही है।

शाह की रणनीति ‘बूथ से जिला’ तक कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद, फीडबैक लेना और उनके अनुभवों को चुनावी प्रचार में शामिल करने की है। प्रत्याशियों की लोकप्रियता, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, स्थानीय मुद्दों की पहचान ये सभी पहलू टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान तक अहम भूमिका निभाएँगे। अमित शाह चुनावी जंग के लिए हर स्तर की तैयारियों को परख रहे हैं।

बीते चुनाव में एनडीए को शाहाबाद और मगध में कई बार चुनौती मिली, 2015 में 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिलीं। 2019 लोकसभा चुनाव में चारों सीटों पर जीत हासिल कर वापसी की, लेकिन 2020 विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन गिरा और केवल दो सीटों पर सिमट गई। 2024 विधानसभा उप चुनाव में भाजपा ने तरारी और रामगढ़ पर जीत हासिल की, लेकिन उसी साल लोकसभा चुनाव में चारों सीटें गंवा दीं।

ये लगातार बदलते चुनावी समीकरण दिखाता है कि चुनौती और संभावनाएं दोनों साथ-साथ हैं। अमित शाह की सियासी सूझबूझ इसी नब्ज़ को पढ़कर नई रणनीति गढ़ रही है।

अमित शाह का ये दौरा सिर्फ सियासी प्रदर्शन नहीं, बल्कि बीजेपी का सांगठनिक ढांचा मजबूती से तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संवाद, रणनीति और समन्वय इन तीन मोर्चों को एक साथ एक्टिव कर, चुनावी सफलताओं की नींव रखी जा रही है। शाह के नेतृत्व में बूथ स्तर से लेकर प्रांतीय और जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं के साथ गहराई से चर्चा की जा रही है, जिससे हर इलाके की जरूरतों, चुनौतियों और ताकत का सही-सही आकलन हो सके।

बिहार के कमजोर क्षेत्रों में एनडीए की स्थिति को दुरुस्त करने के मिशन में अमित शाह पूरी तरह सक्रिय हैं। कार्यकर्ताओं को चुनावी मंत्र, सटीक रणनीति और समन्वय के जरिये शाहाबाद-मगध की सियासी जड़ें मजबूत करने की कोशिश हो रही है।

य़ह कवायद अगले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और एनडीए को नया जोश, स्पष्ट दिशा और मजबूत सांगठनिक आधार देने वाली है। शाह की रणनीति से साफ है कि बीजेपी अब हर स्तर की भूमिका को और सजग, सशक्त बनाकर बिहार की सत्ता में वापसी की गंभीर कोशिश में है, जिससे प्रदेश के राजनैतिक समीकरण एक बार फिर बदल सकते हैं।

Kirti Bhardwaj

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