राजस्थान की राजनीति के ‘एंग्री यंग मैन’ और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जब अपने चिर-परिचित अंदाज में रविंद्र सिंह भाटी के गढ़ शिव विधानसभा पहुंचे तो माहौल में गर्मी सूरज की तपिश से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी की वजह से थी। शिव, जो फिलहाल निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी का अभेद्य ‘गढ़’ माना जाता है, वहां बेनीवाल ने बिना नाम लिए एक ऐसा ‘शब्द-बाण’ छोड़ा कि सियासी गलियारों में सन्नाटा पसर गया।
हनुमान बेनीवाल का ये अंदाज नया नहीं है, लेकिन इस बार उनका तंज इतना नुकीला था कि, वो सीधे सोशल मीडिया पर ‘ट्रेंड’ करने लगा। सवाल एक ही था, आखिर वो कौन था जो बेनीवाल को ‘पेशाब’ का बहाना देकर गायब हुआ, जो फिर कभी वापस ही नहीं लौटा?
बेनीवाल ने 2023 के विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण का वो किस्सा सुनाया जिसे सुनकर सभा में मौजूद लोग पहले तो सन्न रह गए और फिर मंद-मंद मुस्कुराने लगे। बेनीवाल ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा: “आप लोग कहते हैं कि शिव में टिकट गलत दे दिया गया, जबकि मैं तो सही उम्मीदवार दे रहा था… एक निर्दलीय उम्मीदवार मेरे पास आया था… मैंने उससे कहा कि, भाई पार्टी जॉइन करलो… उसने जवाब दिया… ‘भाईसाहब, बस पांच मिनट में पेशाब करके आता हूं… लेकिन वो वापस ही नहीं आया…”
ये किस्सा सुनाते हुए बेनीवाल के चेहरे पर वो शरारती मुस्कान थी, जो अक्सर विपक्षी खेमे में खलबली मचा देती है। राजनीतिक गलियारों में अब इस ‘अदृश्य उम्मीदवार’ की तलाश तेज हो गई है। शिव विधानसभा चुनाव 2023 में मुख्य रूप से तीन निर्दलीय चेहरे थे। भाजपा से बागी हुए रविंद्र सिंह भाटी, कांग्रेस से बागी हुए फतेह खान और तीसरे प्रत्याशी भूराराम। कुछ लोग चुटकी ले रहे हैं कि आखिर वो ‘बायो-ब्रेक’ इतना लंबा किसका था कि, वो सीधा विधानसभा की दहलीज पर ही जाकर खत्म हुआ?
इशारा साफ तौर पर रविंद्र सिंह भाटी की तरफ माना जा रहा है, क्योंकि उस दौर में भाटी और आरएलपी के गठबंधन की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनी हुई थीं। शायद बेनीवाल ये जताना चाहते थे कि आज जिसे जनता ‘टाइगर’ कह रही है, उसने कभी आरएलपी सुप्रीमो के पास हाजिरी लगाई थी।
विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार शिव पहुंचे बेनीवाल ने जनता की नब्ज टटोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बड़े ही नाटकीय अंदाज में कहा कि भले ही यहां से आरएलपी का प्रत्याशी नहीं जीता, लेकिन वे शिव की जनता के लिए आधी रात को भी तैयार हैं।उनका ये कहना कि “भाजपा की सरकार है लेकिन आपका भाई हर काम करवाएगा,” सीधे तौर पर स्थानीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के प्रभाव को कम करने और खुद को क्षेत्र के ‘असली मसीहा’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश थी। बेनीवाल ने आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि उनके इस दौरे के बाद क्षेत्र की राजनीति में कल से ही बड़े बदलाव के संकेत दिखने लगेंगे। अब ये ‘बदलाव’ क्या होगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन बेनीवाल ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर भाटी के गढ़ में दरार डालने की कोशिश जरूर की है।
बेनीवाल सिर्फ अपने विरोधियों पर ही नहीं बरसे, बल्कि उन्होंने भाजपा प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल को भी आड़े हाथों लिया। अग्रवाल द्वारा सचिन पायलट को ‘बहरूपिया’ कहे जाने पर बेनीवाल ने कड़ा एतराज जताते हुए इसे ‘ओछी मानसिकता’ करार दिया। यहां बेनीवाल ने बड़ी चतुराई से जाट-गुर्जर समीकरणों को साधने की कोशिश की। उन्होंने चेतावनी दी कि पायलट जैसे जननेता के खिलाफ ऐसी अभद्र भाषा लोकतंत्र के लिए घातक है और राजस्थान का युवा इसका करारा जवाब देगा।
कुल मिलाकर, हनुमान बेनीवाल का शिव दौरा किसी मसालेदार फिल्म के ट्रेलर जैसा रहा। इसमें सस्पेंस था, कॉमेडी थी और भरपूर एक्शन भी था। अब देखना ये है कि शिव की जनता इस ‘ट्रेलर’ को कितनी गंभीरता से लेती है और बेनीवाल का ये ‘तंज’ रविंद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता पर क्या असर डालता है। पर एक बात तो साफ है, राजस्थान की राजनीति में ‘पेशाब के बहाने’ गायब होने वाला ये किस्सा सालों साल तक याद रखा जाएगा।
