अयोध्या सांसद अवधेश सिंह का बड़ा बयान

राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी संग्राम का रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने बीजेपी और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस मामले को करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए इसे “एक अलग तरह की डकैती” तक कह दिया।

वहीं संसद में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई है… तो आखिर पूरा मामला क्या है? अवधेश प्रसाद ने क्या कहा? संसद में ऐसा क्या हुआ कि मामला पुलिस तक पहुंच गया? अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में अगर मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे में किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है।उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच देश के सामने आ सके।

अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि इस पूरे मुद्दे को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, अगर किसी ने गलत किया है तो उसे कानून और जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा।

सपा सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद के अंदर भी उठा रही है और जनता के बीच भी लगातार आवाज बुलंद कर रही है। उनके मुताबिक यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और जवाबदेही का सवाल है। अपने बयान में अवधेश प्रसाद ने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी सीधा निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगर इस मामले में किसी ने गड़बड़ी की है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अधर्म का काम है और जो भी इसमें शामिल है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर बीजेपी की ओर से अलग-अलग नेताओं ने पहले भी इन्हें राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। यानी एक तरफ विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक हमला बता रहा है। इस विवाद ने शुक्रवार को संसद में भी जोर पकड़ा।

विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा किया। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन की रही। पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर संसद परिसर में धरने पर बैठ गए। उनके सामने एक दान पेटी रखी गई थी, जिस पर लिखा था… “चंदा चोर, गद्दी छोड़।” ये दृश्य देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। इस प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद भी उनके साथ खड़े नजर आए।

विपक्ष का कहना था कि वह मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े सवालों को उठा रहा है, जबकि बीजेपी ने इस प्रदर्शन को आस्था का अपमान बताया..संसद परिसर में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन के दौरान सनातन धर्म की परंपराओं और करोड़ों राम भक्तों की आस्था का मजाक उड़ाया गया। शिकायत में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन का तरीका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था, इसलिए कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। अब ये मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का भी हिस्सा बन गया है।

फिलहाल इस पूरे विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं… एक ओर समाजवादी पार्टी और विपक्ष का कहना है कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर बीजेपी लगातार विपक्ष पर आरोप लगा रही है कि वह धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।

यानी मामला अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद, सड़क और अदालत तीनों जगह पहुंच चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पूरे विवाद की निष्पक्ष जांच होगी? क्या लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने आएंगे? और क्या एफआईआर के बाद यह मामला नई राजनीतिक बहस को जन्म देगा?

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