दिल्ली एक और निर्भया कांड ! महिला सुरक्षा पर उठे सवाल !

दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। देश की राजधानी में 14 साल बाद निर्भया कांड जैसी दर्दनाक घटना सामने आने से लोगों में गुस्सा और डर दोनों बढ़ गए हैं। रानी बाग इलाके में चलती स्लीपर बस में एक महिला के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है और बस को जब्त कर लिया है लेकिन इस घटना ने दिल्ली की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक पीड़िता 30 वर्षीय महिला है, जो तीन बच्चों की मां है। उसका परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा है और उसके पति टीबी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। महिला सोमवार रात फैक्ट्री से काम खत्म कर घर लौट रही थी। इसी दौरान वो सरस्वती विहार इलाके में बस स्टैंड के पास पहुंची और बस के दरवाजे पर खड़े कंडक्टर से समय पूछा। आरोप है कि इसी दौरान कंडक्टर ने महिला को जबरन बस के अंदर खींच लिया। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने मिलकर महिला के साथ दरिंदगी को अंजाम दिया।

बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे तक बस शहर में घूमती रही और महिला के साथ अत्याचार होता रहा। बाद में आरोपियों ने पीड़िता को सड़क किनारे फेंक दिया। इस घटना ने लोगों को 2012 के निर्भया कांड की भयानत यादें ताजा कर दी हैं। उस घटना के बाद देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, कानून बदले गए थे और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बातें हुई थीं। लेकिन अब इस घटना ने उन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं, इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हमने निर्भया से कुछ नहीं सीखा, ये हादसा पूरे समाज के लिए कलंक है। उन्होंने इस घटना को सिर्फ कानून व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि सामाजिक सोच की भी हार बताया।

वहीं मनीष सिसोदिया ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बच्चियां स्कूलों में सुरक्षित नहीं हैं और महिलाएं बसों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहीं। उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

वहीं, पूरी सीएम आतिशी ने भी इस घटना को बेहद दुखद और शर्मनाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा नहीं बल्कि प्रचार और ब्रांडिंग बन गई है। आतिशी ने कहा कि जब अपराधियों को कानून का डर नहीं रहेगा तो ऐसी घटनाएं बढ़ती जाएंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दिल्ली की महिलाएं कब तक भय के माहौल में जीने को मजबूर रहेंगी।

इसके अलावा सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर कैसे एक बस दो घंटे तक शहर में घूमती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि घटना की जानकारी दो दिन तक दबाने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि राजधानी में ऐसी घटनाएं सुरक्षा तंत्र की नाकामी को उजागर करती हैं।

हालांकि पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलते ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस ये भी जांच कर रही है कि घटना के दौरान बस किन-किन इलाकों से होकर गुजरी और कहीं अन्य लोग भी इसमें शामिल तो नहीं थे।

ये घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हर बार घटना के बाद बहस होती है, मोमबत्तियां जलती हैं, सख्त कानूनों की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव अब भी अधूरा नजर आता है। राजधानी दिल्ली में अगर महिलाएं सार्वजनिक परिवहन में भी सुरक्षित नहीं हैं, तो ये बेहद चिंताजनक स्थिति है।

जरूरत इस बात की है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहने के बजाय महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सार्वजनिक परिवहन की निगरानी बढ़ाई जाए, रात में गश्त मजबूत हो, बसों में GPS और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हों और अपराधियों को तेजी से सजा मिले तभी ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है और महिलाओं में सुरक्षा का विश्वास वापस लौट सकता है।

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By admin