Akhilesh Yadav call CM Yogi infiltrator: अखिलेश यादव ने CM योगी को क्यों कहा ‘घुसपैठिया’?Akhilesh Yadav call CM Yogi infiltrator: अखिलेश यादव ने CM योगी को क्यों कहा ‘घुसपैठिया’?

Akhilesh Yadav call CM Yogi infiltrator: अखिलेश यादव ने CM योगी को क्यों कहा ‘घुसपैठिया’?

उत्तर प्रदेश की सियासत में रविवार को एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “घुसपैठिया” कहकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला। अखिलेश यादव ने यह तीखा बयान लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया पार्क में डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए दिया।

अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में अपने बयान में कुछ राजनीतिक दलों पर “घुसपैठियों” को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था उसके जवाब में यह टिप्पणी की गई है। अमित शाह ने गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ की कोई खबर न आने की बात करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से विपक्षी दलों पर निशाना साधा था।

इसी के जवाब में अखिलेश ने पलटवार करते हुए कहा, “हमारे उत्तर प्रदेश में भी घुसपैठिए हैं। मुख्यमंत्री उत्तराखंड से हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें उनके गृह राज्य वापस भेजा जाए।” उन्होंने कहा, “वह सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि वैचारिक रूप से भी घुसपैठिए हैं। योगी आदित्यनाथ न तो बीजेपी के मूल सदस्य हैं और न ही आरंभ से इस विचारधारा से जुड़े रहे हैं। वह किसी और विचारधारा से आए हैं, तो इन वैचारिक घुसपैठियों को कब निकाला जाएगा?”

अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर भाजपा की उस रणनीति पर हमला है, जिसमें पार्टी घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और धर्म आधारित राजनीति को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही है। यादव ने कहा कि भाजपा की राजनीति झूठे आंकड़ों और भ्रम फैलाने पर टिकी है। उन्होंने तंज करते हुए कहा, “अगर कोई उनके आंकड़ों पर विश्वास करे, तो वे खो जाएंगे।”

उन्होंने भाजपा सरकार पर जनगणना, जनसंख्या और सामाजिक संरचना के आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का भी आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि भाजपा सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए डर और भ्रम का माहौल बना रही है।

इस दौरान अखिलेश यादव ने रायबरेली मॉब लिंचिंग मामले को लेकर भी प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर हम NCRB यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों को देखें, तो साफ पता चलता है कि इस सरकार के कार्यकाल में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं।”

उन्होंने हाल ही में रायबरेली में हुई वाल्मीकि समुदाय के एक युवक की हत्या को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि यह घटना बताती है कि सरकार दलितों की सुरक्षा के मामले में कितनी असंवेदनशील है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और समाज के कमजोर तबकों को न्याय नहीं मिल रहा है।

अखिलेश यादव ने राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोहिया हमेशा अन्याय, भेदभाव और गैर-जवाबदेही के खिलाफ खड़े रहे। उन्होंने कहा, “आज जब हम डॉ. लोहिया को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहां एकत्र हुए हैं, तो यह भी जरूरी है कि हम उनके विचारों को आगे बढ़ाएं और जातिवाद, असमानता और राजनीतिक असत्य के खिलाफ आवाज उठाएं।”

सपा प्रमुख ने कहा कि समाज में जब तक जातीय भेदभाव रहेगा, तब तक सच्चा लोकतंत्र नहीं आ सकता। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सरकार सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है।

कार्यक्रम में उपस्थित पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी डॉ. लोहिया के विचारों को लेकर गांव-गांव जाएगी और लोगों को जागरूक करेगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि वह सिर्फ ध्यान भटकाने की राजनीति करती है। उन्होंने कहा, “जब भी असल मुद्दों की बात आती है — जैसे महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक अत्याचार — तब भाजपा सांप्रदायिक और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को हवा देती है ताकि लोगों का ध्यान असल समस्याओं से हटाया जा सके।”

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