नूंह की महिला BDPO को ACB ने किया गिरफ्तारनूंह की महिला BDPO को ACB ने किया गिरफ्तार

नूंह की महिला BDPO को ACB ने किया गिरफ्तार

 

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें नूंह जिले की महिला ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) पूजा शर्मा और ठेकेदार हीरालाल को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर करीब 22 करोड़ रुपये के गबन का गंभीर आरोप है

ये मामला वर्ष 2020 के कोरोना काल का बताया जा रहा है, जब पूजा शर्मा ने तिगांव के गांव मुजेड़ी में कार्यवाहक सरपंच ब्रह्मपाल और ग्राम सचिव जोगेन्द्र के साथ मिलीभगत करके सरकारी फंड का दुरुपयोग किया था।

साल 2020 में जब महामारी के कारण देशभर में लॉकडाउन जैसी स्थिति थी, तब पूजा शर्मा तिगांव में BDPO के पद पर तैनात थीं। उसी दौरान मुजेड़ी गांव में विकास कार्यों के नाम पर नकली बिल लगवाकर 22 करोड़ रुपये का गबन हुआ।

इन अवैध कार्यों में पूजा शर्मा के अलावा कार्यवाहक सरपंच, ग्राम सचिव और ठेकेदार भी शामिल थे। अकेले हीरालाल नामक ठेकेदार को 17 करोड़ 14 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस भारीभरकम राशि के लेन-देन से अधिकारियों को संदेह हुआ और मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा गया

एसीबी ने जांच शुरू की तो पता चला कि हीरालाल और अन्य कंपनियों के खातों में लगभग 28 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। इस कारण विभाग ने पंचायत के खाते को सील करने का आदेश दिया। लेकिन जांच में पाया गया कि पूजा शर्मा ने अपनी ताकत का इस्तेमाल बलपूर्वक करते हुए खाते को फिर से चालू करवा लिया था।

जांच एजेंसियों ने जब दस्तावेजों का विश्लेषण किया तो पता चला कि पूजा शर्मा ने फर्म रसिक बिहारी इंफ्राटेक एंड कन्स्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने की एवज में 9 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। यह रिश्वत सीधे बैंक लेन-देन के माध्यम से दी गई थी जिससे भ्रष्टाचार का पूरा तानाबाना उजागर हो गया।

एसीबी के अधिकारियों के मुताबिक नवंबर 2020 में बीडीपीओ पूजा शर्मा, ठेकेदार हीरालाल और मुजेड़ी गांव के तत्कालीन सरपंच ने पेड़-पौधों के रोपण के नाम पर 43 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। सूत्रों के अनुसार नवंबर-दिसंबर के महीनों में पेड़-पौधों की रोपाई बिल्कुल असंभव थी, मगर बिलों में ज़बर्दस्ती ऐसे कार्य दर्शाए गए।

हकीकत में, पेड़-पौधों के लगने के बिल जून 2021 के बाद पाए गए, यानी बिल डुप्लीकेट थे और कार्य उस वक्त नहीं हुए जब दिखाए गए थे।

फरीदाबाद के तत्कालीन डीसी यशपाल यादव ने इस गबन को लेकर अप्रैल 2021 में सदर थाना बल्लभगढ़ में FIR दर्ज करवाई थी। इससे पहले डीसी ने पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी।

एफआईआर के अनुसार, फरवरी 2020 से मई 2020 के बीच मुजेड़ी ग्राम पंचायत में पूर्व सरपंच रानी, निलंबित ग्राम सचिव विजयपाल द्वारा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के लगभग दो करोड़ 32 लाख रुपये निकाले गए। कमेटी की जांच में पाया गया कि पंचायत को 69 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय हानि हुई थी।

विभिन्न फर्मों को भुगतान करने में भी भारी अनियमितताएं देखी गईं। उदाहरण के तौर पर, मैसर्स फरहान इंटरप्राइजेज, संतगुरु इंटरप्राइजेज को पैसे दिए गए हैं, लेकिन वस्तुओं के वास्तविक मूल्य से कहीं ज्यादा दर्शाया गया। काम हुए नहीं, लेकिन बिल लगाकर पैसा निकाल लिया गया। यह सरकारी फंड की खुली लूट थी।

जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत मुजेड़ी की ओर से शिवगंगा कॉन्ट्रैक्टर के मालिक ललित मोहन शर्मा उर्फ प्रिंस, जो पूजा शर्मा का सगा भाई है, को 54 लाख रुपये के चेक बिना किसी काम के जारी किए गए। केवल भाई की फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई और पूजा शर्मा ने लगभग 70 लाख रुपये अपनी भाई की कंपनी को दे दिए।

एफआईआर दर्ज होने के बाद विभाग ने पूजा शर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। लेकिन कुछ महीने बाद, उन्होंने हाईकोर्ट से ऑर्डर लाकर फिर से ड्यूटी जॉइन कर ली। इस समय वे पुन्हाना बीडीपीओ का चार्ज संभाल रही थीं। सरकारी पद का दुरुपयोग कर उन्होंने बार-बार व्यवस्था को अप्रभावी साबित किया।

पूरे मामले ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये के फंड का गबन न केवल विकास कार्यों में बाधक है, बल्कि समाज में सरकारी विभागों के प्रति विश्वास को भी कमज़ोर करता है।

सरकार और जांच एजेंसी ने इस मामले में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है ताकि दोषियों को सज़ा मिल सके। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और बाहरी दिखावटी जांच प्रक्रिया कितनी जरूरी है।