हरियाणा के फतेहाबाद जिले में बाढ़ से भारी नुकसानहरियाणा के फतेहाबाद जिले में बाढ़ से भारी नुकसान

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में बाढ़ से भारी नुकसान

 

 

जहां पंजाब बाढ़ में डूबा हुआ है… वहीं, हरियाणा भी बाढ़ की चपेट से अछूता नहीं है.. बात करें, फतेहाबाद जिले की…. तो यहां भी बाढ़ का सिलसिला थम नहीं रहा है। बेशक घग्गर नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। लेकिन अभी भी करीब 15,320 क्यूसेक पानी घग्गर नदी में बह रहा है

ये ही वजह है कि, जिले के लगभग 20 गांवों में आज भी खेतों और ढाणियों में पानी भरा हुआ है। घरों के आगे पानी जमा है, खेत पूरी तरह जलमग्न हैं और किसानों की मेहनत की फसल जलमग्न हो चुकी है।

गांव चिंदड़, खाराखेड़ी, बड़ोपल, कुम्हारिया, भोडा होशनाक, नहला, गोरखपुर, रामसरा, जांडवाला बागड़, ठुइयां, खाबड़ा कलां, बनगांव, गाजूवाला समेत कई गांवों के लोग इन दिनों जलभराव से परेशान हैं।

किसानों का कहना है कि, पंचायतें अपने स्तर पर पंप और मोटरें लगाकर पानी निकालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों के मुताबिक प्रशासन खेतों में भरे पानी को निकालने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।

साथ ही ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि, अधिकारी केवल घग्गर नदी और हिसार मल्टीपर्पज ड्रेन को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं। गांवों और खेतों के जलभराव पर उनका ध्यान ही नहीं है। यही वजह है कि, गांव-ढाणियों में रह रहे लोगों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं

इन इलाकों में नरमा, कपास और धान की फसल पूरी तरह से पानी में डूबकर बरबाद हो चुकी है। इस सीजन की फसल बरबाद होने के बाद किसानों को चिंता अब अगली बुवाई को लेकर है। जब तक खेतों से पानी नहीं निकलेगा, तब तक नई बिजाई संभव नहीं होगी।

अगर आने वाले दिनों में पानी निकासी नहीं हुई तो किसानों को एक सीजन पूरी तरह खाली हाथ गुजरना पड़ेगा।

किसानों का कहना है कि, पिछले कई महीनों की मेहनत और हजारों रुपये की लागत पानी में बह गई है। अब अगर सरकार और प्रशासन ने राहत नहीं दी तो उनके सामने रोज़मर्रा की जिंदगी चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। गांव चिंदड़ में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं।

यहां खेतों और सड़कों तक पर पानी भरा है। वहीं जिला परिषद के सीईओ सुरेश कुमार का कहना है कि, वर्तमान समय में प्रशासन की पहली प्राथमिकता घग्गर नदी और हिसार मल्टीपर्पज ड्रेन के हालात संभालना है। अगर यहां पानी का दबाव बढ़ता है तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।

उन्होंने बताया कि, जिले में इस समय 173 मोटरें चल रही हैं, जिनसे पानी निकासी का काम किया जा रहा है।

इस के साथ सुरेश कुमार का कहना है कि, आबादी क्षेत्र में कहीं भी पानी भरा होता है तो उसे तुरंत निकाला जा रहा है। हालांकि खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए अभी समय लगेगा। अधिकारियों का दावा है कि, जैसे ही नदी और ड्रेन का हाल स्थिर होता है, वैसे ही अतिरिक्त मोटरें खेतों में लगाए जाएंगी ताकि किसानों की फसल बच सके।

प्रशासन की सफाई के बावजूद किसानों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। खेतों में लगी फसल बर्बाद हो चुकी है और अब उनकी उम्मीदें मुआवजे और सरकार से मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं। किसानों का कहना है कि, अगर सरकार ने तुरंत आर्थिक मदद नहीं की तो उनका गुजारा मुश्किल हो जाएगा।

वही किसान संगठनों ने भी प्रशासन से अपील की है कि, हालात का तुरंत संज्ञान लेकर खेतों से पानी निकालने की कार्रवाई तेज की जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।
सिर्फ खेत ही नहीं, बल्कि कई जगह नेशनल हाईवे के किनारे बसे गांवों की स्थिति भी खराब है।

खाराखेड़ी और बड़ोपल जैसे गांवों में खेतों के साथ-साथ घरों में भी पानी घुसा हुआ है। कई ग्रामीण मजबूरी में अपना सामान और मवेशी लेकर सुरक्षित जगहों पर जा चुके हैं।

वही विपक्ष का कहना है कि, फतेहाबाद के गांवों में जलभराव की ये स्थिति सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी नतीजा मानी जा रही है। किसान और ग्रामीण अपने स्तर पर जूझ रहे हैं, लेकिन अकेले उनकी कोशिशें नाकाफी हैं।

जब तक प्रशासन पूरी ताकत से खेतों से पानी निकालने की दिशा में काम नहीं करेगा, तब तक किसानों की मुश्किलें खत्म होना मुश्किल है। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन उनकी सुनवाई करेगा और राहत कार्यों में तेजी लाएगा। वरना हजारों परिवारों का जीवन जलभराव में डूबा रह जाएगा।

By admin

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