Rajasthan Uranium Mining Project: राजस्थान के सीकर जिले में करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से राज्य की पहली यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण परियोजना विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। खंडेला क्षेत्र के रॉयल गांव में जमीन से लगभग 400 फीट नीचे मौजूद यूरेनियम युक्त अयस्क को सुरंग के जरिए निकालने की योजना है। परियोजना को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया जा रहा है। इससे करीब 5,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, व्यावसायिक खनन शुरू करने से पहले आवश्यक सरकारी और पर्यावरणीय मंजूरियां हासिल करना बाकी है।
राजस्थान में पहली बार बड़े स्तर पर यूरेनियम खनन की तैयारी
राजस्थान अब तांबा, जस्ता, संगमरमर और अन्य खनिजों के साथ यूरेनियम उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीकर जिले के खंडेला उपखंड में स्थित रॉयल और सुहागपुरा गांवों के आसपास यूरेनियम के भंडार की पहचान की गई है।
इस परियोजना को केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाली यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) विकसित करेगी। यहां यूरेनियम युक्त अयस्क के खनन के साथ उसके प्रसंस्करण की भी योजना है।
केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में लोकसभा में बताया था कि रोहिल यूरेनियम भंडार के लिए UCIL को प्रस्तावित खनन पट्टाधारक नामित किया गया है और खनन शुरू करने के लिए वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
400 फीट गहराई में यूरेनियम, एक किलोमीटर लंबी सुरंग से होगा खनन
सीकर के रॉयल और सुहागपुरा क्षेत्र में यूरेनियम युक्त अयस्क जमीन के भीतर चट्टानों के बीच मौजूद है। इसे निकालने के लिए भूमिगत खनन तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परियोजना में करीब एक किलोमीटर लंबी और छह मीटर चौड़ी सुरंग का प्रावधान है। इस सुरंग के निर्माण पर लगभग 22 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
योजना के तहत करीब 400 फीट की गहराई से यूरेनियम युक्त अयस्क निकाला जाएगा। इसके बाद प्रसंस्करण संयंत्र में अयस्क से यूरेनियम प्राप्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
3,000 करोड़ रुपये का निवेश, हजारों युवाओं को रोजगार की उम्मीद
इस परियोजना को शेखावाटी क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग 3,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
परियोजना से करीब 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इनमें खनन, मशीन संचालन, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, रखरखाव और अन्य सहायक गतिविधियों से जुड़े रोजगार शामिल हो सकते हैं।
इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में काम मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना के शुरू होने और संचालन की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी।
500 बीघा से अधिक जमीन के अधिग्रहण की तैयारी
परियोजना के लिए रॉयल गांव और आसपास के क्षेत्रों में 500 बीघा से अधिक जमीन अधिग्रहित करने की तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन संबंधित खातेदारों का सर्वे कर उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करेगा। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित परिवार खेती या अन्य किन आजीविका के साधनों पर निर्भर हैं।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े निर्णय लिए जाएंगे। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अप्रैल 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य बताया गया है।
इस परियोजना में स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा, उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
सीकर शहर से पाइपलाइन के जरिए पहुंचेगा पानी
यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण संयंत्र के संचालन के लिए पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए सीकर शहर से पाइपलाइन के माध्यम से परियोजना स्थल तक पानी पहुंचाने की योजना है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में नगर परिषद और UCIL के बीच समझौता ज्ञापन होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, परियोजना के लिए पानी की उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय जल संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन भी आवश्यक होगा।
2005 में हुई थी यूरेनियम की पुष्टि
सीकर के इस क्षेत्र में यूरेनियम की खोज का इतिहास कई दशक पुराना है। रॉयल गांव में वर्ष 1998 के आसपास यूरेनियम की संभावनाओं की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद सर्वेक्षण और खोज का काम शुरू हुआ।
वर्ष 2005 में यहां यूरेनियम की मौजूदगी की पुष्टि हुई। बाद में खनन परियोजना की योजना तैयार की गई और वर्ष 2022 में राज्य के खनन विभाग ने UCIL को आशय पत्र जारी किया।
रिपोर्ट्स में करीब 1,086.46 हेक्टेयर क्षेत्र और लगभग 12 मिलियन टन खनिज भंडार का उल्लेख है। यह आंकड़ा शुद्ध यूरेनियम धातु की मात्रा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि अयस्क और उसमें मौजूद यूरेनियम की मात्रा अलग-अलग होती है।
झुंझुनूं और नीमकाथाना में भी यूरेनियम की तलाश
सीकर के अलावा शेखावाटी क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी यूरेनियम की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र में जहाज और नृसिंहपुरी गांवों के साथ नीमकाथाना क्षेत्र में भी यूरेनियम की संभावनाओं को लेकर आगे सर्वे किए जाने की बात सामने आई है।
यदि इन इलाकों में आर्थिक रूप से उपयोगी भंडार की पुष्टि होती है, तो भविष्य में खनन परियोजनाओं की संभावनाएं बन सकती हैं। फिलहाल इन क्षेत्रों में व्यावसायिक खनन को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यूरेनियम?
यूरेनियम एक महत्वपूर्ण रेडियोधर्मी धातु है, जिसका प्रमुख उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में होता है। भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम आधारित ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है।
देश में घरेलू यूरेनियम उत्पादन बढ़ने से परमाणु ईंधन की आपूर्ति को मजबूती मिल सकती है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने बताया था कि सीकर के रोहिल में प्रतिदिन 2,500 टन अयस्क प्रसंस्करण क्षमता वाली परियोजना प्रस्तावित है। हालांकि, इसे शुरू करने के लिए विभिन्न वैधानिक मंजूरियां आवश्यक हैं।
2030 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य
राजस्थान की इस प्रस्तावित यूरेनियम परियोजना को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इसके लिए जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी, बुनियादी ढांचे का विकास और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करना जरूरी होगा।
यूरेनियम रेडियोधर्मी खनिज होने के कारण इसके खनन और प्रसंस्करण में श्रमिक सुरक्षा, विकिरण निगरानी, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के विशेष मानकों का पालन करना होगा।
यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो सीकर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव परियोजना के शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
