Hospital Protest Sanitation Strike and Unpaid Wages

Ajmer JLN Hospital Strike News: राजस्थान के अजमेर स्थित जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल में सफाई कर्मचारियों ने बकाया वेतन की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पिछले दो महीने से मानदेय नहीं मिलने से नाराज संविदा सफाईकर्मियों ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों ने अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर एकत्र होकर अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं किया जाता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

दो महीने से वेतन नहीं मिला, सफाईकर्मियों का फूटा गुस्सा
अजमेर संभाग के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल जेएलएन चिकित्सालय में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन ने अस्पताल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

गुरुवार सुबह संविदा सफाई कर्मचारी अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर एकत्र हुए और बकाया मानदेय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों का आरोप है कि वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो महीने से उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया राशि उनके खातों में नहीं पहुंचती, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

हर महीने सिर्फ 6 हजार रुपये मानदेय, वह भी समय पर नहीं
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें प्रतिमाह महज 6 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतनी कम राशि में परिवार चलाना पहले ही चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भुगतान में लगातार देरी से उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।

कर्मचारियों के अनुसार, त्योहारों के समय भी उन्हें वेतन नहीं मिला। इसके कारण घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है।

प्रदर्शन में शामिल महिला सफाई कर्मचारी अनीता ने बताया कि 29 अक्टूबर तक भी उनका बकाया मानदेय जारी नहीं हुआ।

उनका आरोप है कि भुगतान के लिए कर्मचारियों को बार-बार मेट्रन कार्यालय जाना पड़ता है। कभी हस्ताक्षर तो कभी बायोमीट्रिक सत्यापन का हवाला देकर भुगतान टाल दिया जाता है।

कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें करवा चौथ जैसे त्योहार पर भी वेतन की मांग के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

सुपरवाइजरों का भी छह महीने से भुगतान अटका
सफाई कर्मचारियों के साथ अस्पताल में कार्यरत सुपरवाइजरों ने भी बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया है।

सुपरवाइजरों का कहना है कि उनका पिछले छह महीने का भुगतान लंबित है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार की ओर से 28 अक्टूबर तक बकाया राशि जारी करने का आश्वासन दिया गया था।

लेकिन निर्धारित तारीख गुजरने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।

लगातार हो रही देरी और आर्थिक परेशानियों से नाराज सुपरवाइजरों ने ठेकेदार को अपने लिखित इस्तीफे भी सौंप दिए हैं।

अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार के बीच भुगतान को लेकर खींचतान
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कर्मचारियों के अनुसार, ठेकेदार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन से भुगतान नहीं मिलने के कारण वह कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहा है।

दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन की ओर से भुगतान की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाली जा रही है।

इस खींचतान के बीच सफाई कर्मचारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि भुगतान की जिम्मेदारी चाहे किसी की भी हो, नियमित काम करने के बावजूद उन्हें वेतन से वंचित रखना उचित नहीं है।

पहले भी उठ चुका है वेतन और PF भुगतान का मामला
जेएलएन अस्पताल में संविदा कर्मचारियों के भुगतान को लेकर विवाद नया नहीं है।

23 अक्टूबर को अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने भी ठेका कर्मचारियों के बकाया वेतन और भविष्य निधि (PF) से संबंधित शिकायतों का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने मुख्यमंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, जिला कलेक्टर और अस्पताल प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।

शैलेश गुप्ता ने आरोप लगाया था कि कुछ ठेका कर्मचारियों का दो महीने का वेतन लंबित है और पिछले 10 महीने से पीएफ की राशि खातों में जमा नहीं कराई गई है।

उन्होंने संबंधित ठेका एजेंसियों के भुगतान रिकॉर्ड की जांच और कर्मचारियों की लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग भी की थी। हालांकि, पीएफ संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हड़ताल लंबी चली तो अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
जेएलएन अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लंबी खिंचने पर अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

विशेष रूप से आपातकालीन विभाग, वार्ड और अन्य संवेदनशील चिकित्सा क्षेत्रों में नियमित सफाई बेहद जरूरी है।

हालांकि, फिलहाल हड़ताल से अस्पताल की सफाई व्यवस्था कितनी प्रभावित हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

बकाया मानदेय मिलने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी
सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल आश्वासन के आधार पर काम पर नहीं लौटेंगे। उनकी प्रमुख मांग दो महीने के लंबित मानदेय का पूरा भुगतान है।

वहीं, सुपरवाइजरों ने भी छह महीने का बकाया भुगतान जारी करने की मांग उठाई है।

अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित ठेकेदार के बीच भुगतान को लेकर कब सहमति बनती है और कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

फिलहाल अजमेर के जेएलएन अस्पताल में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

By Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।