CCTV से पकड़ा D 200 गैंग सरगना

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने अंतरराज्यीय नकबजनी गिरोह D-200 के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गाजियाबाद से जुड़े इस गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने करीब 100 किलोमीटर के दायरे में 500 CCTV कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों की दोस्ती जेल में हुई थी और बाद में उनकी पत्नियां भी एक-दूसरे की धर्म की बहन बन गई थीं।

जयपुर पुलिस ने किया D-200 गैंग का खुलासा
जयपुर, 19 अक्टूबर 2026। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बंद मकानों में चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जवाहर नगर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़े D-200 गैंग के कथित सरगना मोमिन उर्फ मोहसिन और उसके साथी शैलेंद्र गुर्जर उर्फ शैली को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा चोरी के जेवरात खरीदने के आरोप में एक सुनार को भी पकड़ा गया है।

इस मामले में सबसे दिलचस्प खुलासा आरोपियों के आपसी संबंधों को लेकर हुआ है। पुलिस जांच के मुताबिक, दो आरोपियों की दोस्ती वर्ष 2016 में गाजियाबाद की डासना जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद दोनों की दोस्ती पारिवारिक रिश्तों में बदल गई।

डासना जेल में हुई दोस्ती, पत्नियां बन गईं धर्म की बहनें
पुलिस के अनुसार, मोमिन उर्फ मोहसिन और शैलेंद्र गुर्जर उर्फ शैली की मुलाकात वर्ष 2016 में डासना जेल में हुई थी।

जेल से बाहर आने के बाद दोनों संपर्क में रहे। धीरे-धीरे उनके परिवारों के बीच भी नजदीकियां बढ़ गईं। दोनों की पत्नियों ने एक-दूसरे को धर्म की बहन मान लिया।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस पारिवारिक जुड़ाव ने दोनों आरोपियों के बीच भरोसे को मजबूत किया। पुलिस का आरोप है कि इसी संपर्क के जरिए दोनों ने मिलकर चोरी की कई वारदातों को अंजाम दिया।

500 CCTV कैमरे खंगाले, 100 किलोमीटर तक जांच
जयपुर के जवाहर नगर इलाके में लगातार सामने आ रही चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस ने विशेष जांच शुरू की थी।

थानाधिकारी सरला यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने घटनास्थलों और संदिग्धों के आने-जाने के रास्तों की जांच की।

पुलिस टीम में शामिल कांस्टेबल मुकेश कुमार, धर्मपाल और अशोक कुमार ने करीब 100 किलोमीटर के क्षेत्र में लगे 500 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।

फुटेज और तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करने के बाद पुलिस संदिग्धों की पहचान करने में सफल रही। इसके बाद आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

कौन हैं गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी?
जयपुर पूर्व की पुलिस उपायुक्त रंजीता शर्मा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • मोमिन उर्फ मोहसिन: गाजियाबाद के डासना का निवासी और D-200 गिरोह का कथित सरगना।
  • शैलेंद्र गुर्जर उर्फ शैली: उत्तर प्रदेश के हापुड़ का निवासी और गिरोह का सक्रिय सदस्य।
  • प्रवीण कुमार वर्मा: हापुड़ के पिलखुवा का रहने वाला सुनार, जिस पर चोरी के सोने-चांदी के जेवरात खरीदने का आरोप है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मोमिन गाजियाबाद के वेव सिटी थाने और शैलेंद्र हापुड़ के धौलाना थाने का हिस्ट्रीशीटर है।

मोमिन के खिलाफ जयपुर में सात और उत्तर प्रदेश व दिल्ली सहित कुल 24 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। वहीं शैलेंद्र के खिलाफ करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

रात में जयपुर पहुंचते, सुबह करते थे रेकी
एडिशनल डीसीपी पारस जैन के अनुसार, गिरोह के सदस्य कथित तौर पर बिना नंबर की स्कूटी से जयपुर पहुंचते थे।

सुबह के समय शहर की पॉश कॉलोनियों में घूमकर ऐसे मकानों की पहचान करते थे, जिनमें कोई मौजूद नहीं होता था।

इसके बाद मौका देखकर ताला तोड़ते और घरों में रखे सोने-चांदी के आभूषण व नकदी लेकर फरार हो जाते थे।

पुलिस के मुताबिक, पहचान छिपाने के लिए आरोपी हेलमेट और मास्क का इस्तेमाल करते थे, ताकि CCTV कैमरों में उनके चेहरे स्पष्ट दिखाई न दें।

बिना नंबर की स्कूटी और ताला तोड़ने के औजार बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों से वारदात में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई बिना नंबर की जुपिटर स्कूटी और ताला तोड़ने के औजार बरामद किए हैं।

पुलिस का कहना है कि बरामद सामान की मदद से आरोपियों के अन्य चोरी के मामलों से संबंधों की जांच की जा रही है।

5 मार्च की चोरी से शुरू हुई जांच
मामले की जांच में जवाहर नगर थाना क्षेत्र की एक पुरानी चोरी की घटना भी महत्वपूर्ण रही।

जानकारी के अनुसार, 5 मार्च को रेजिडेंसी सेक्टर-4 स्थित फ्लैट नंबर 404 में चोरी की घटना सामने आई थी।

फ्लैट मालिक प्रदीप कुमार चाहर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह सुबह अपने कार्यालय गए थे और परिवार के सदस्य गांव गए हुए थे।

इसी दौरान सूने फ्लैट में चोरी हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज जुटाई।

दूसरे राज्यों में भी आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जयपुर में हुई अन्य चोरी की वारदातों में इस गिरोह की क्या भूमिका रही है और चोरी का सामान किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।

पुलिस की तकनीकी जांच बनी गिरफ्तारी की अहम कड़ी
इस पूरे मामले में पुलिस की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण साबित हुई। सैकड़ों CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण और संदिग्धों के रास्तों की पहचान करने के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंच सकी।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और मामले की आगे की जांच जारी है। अन्य वारदातों में उनकी कथित संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

By Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।