5102 mp 287947 128318497275943485866681 766075686497326145 602950154262291

भोपाल
 मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जाएगी. अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम का लोकार्पण किया है. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है. एक समय था जब मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 10 के आसपास थी, लेकिन यदि आज प्रदेश में बाघों की गिनती कराई जाए तो यह 1 हजार से भी ज्यादा निकलेगी। 

गुरु का मतलब अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाना
कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी. सीएम मोहन ने कहा कि “गुरु का मतलब ही होता है अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने वाला शब्द, हमको गुरु से परिचय कराता है. दुनिया में भारत अपनी अलग पहचान रखता है, उसकी वजह यहां की गुरु संस्कृति है. इस उदार भाव को लेकर चलते हैं. आज सिर्फ हम बाघ की बात नहीं कर रहे, बल्कि पूरी धरती की बात कर रहे हैं। 

हम जब किसी भी देवी-देवता की बात करते हैं, तो उनके साथ प्रकृति के संबंध को बताने के लिए उनके वाहन को हमेशा अलग-अलग पशु-पक्षी जगत से जोड़ा जाता है. पिछले दिनों ओरछा गया था, वहां बहुत खूबसूरत मां लक्ष्मी का मंदिर बना हुआ है, जब इस मंदिर को दूर से देखते हैं तो उसकी आकृति उल्लू के प्रकार की है. उस बिल्डिंग को 300 साल पहले बनाया गया था। 

हम पालते हैं, राजस्थान उठाते हैं फायदा
जब हम शक्ति की बात करते हैं तो बाघ की अपने आप कल्पना आ जाती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कई विभागों के साथ चलता है, लेकिन मुझे सबसे ज्यादा आनंद वन विभाग के साथ आता है. अंदर की चेतना का आनंद अलग ही होता है. सीएम ने कहा कि सबसे स्वच्छ नदी चंबल है. चंबल के अंदर हम घड़ियाल बचाने का काम कर रहे हैं, लेकिन यह अलग बात है कि घड़ियाल के बच्चे दो-ढाई साल में जब थोड़े बड़े होते हैं, तब उन्हें पानी में छोड़ा जाता है. यह अलग बात है कि घड़ियाल हम छोड़ रहे हैं, लेकिन घड़ियाल सेंचुरी के नाम पर नाम राजस्थान वाले कमा रहे हैं। 

हमारे घड़ियाल हमारे पास रहे
उन्होंने इसके नाम पर टूरिज्म डेवलप कर लिया. चंबल में मगरमच्छ भी हो गए हैं, इससे घड़ियाल को खतरा भी हो रहा है, क्योंकि यह ताकतवर होते हैं. इसलिए इस बात से कूनो पालनपुर की नदी में घड़ियाल छोडे़ गए हैं, ताकि हमारे घड़ियाल हमारे पास ही रहें, इससे ईको सिस्टम भी बन रहा है. उन्होंने कहा कि आजकल जब दूसरे राज्यों से बात करता हूं तो यह देखते हैं कि दूसरे राज्यों से कौन से वन्यजीव लिए जा सकते हैं। 

टाइगर देकर दूसरे जानवर ले रहे
टाइगर देकर अभी जंगली भैंसे लिए गए हैं. यह 100 साल पहले मध्य प्रदेश से विलुप्त हो गए थे. हाथी तो अपने आप मध्य प्रदेश आ गए, लेकिन गेंडे भी लिए जा रहे हैं. प्रदेश में 53 साल पहले बाघों की संख्या सिर्फ दो अंकों में ही थी, जो 2016 में बाघों की संख्या करीब 250 हो गए और अब बाघों की संख्या कराई जाए तो यह 1 हजार से ज्यादा पहुंच जाएंगे. जंगल में भोपाल शहर के पास बाघ रह रहे हैं, इस मामले में हम भाग्यशाली हैं. सह अस्तित्व का इससे अच्छा उदाहरण कोई दूसरा नहीं हो सकता।