संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाज़ी देखने को मिली। संसद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया और विपक्ष से सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए “56 साल के युवा” का जिक्र कर राजनीतिक तंज भी कसा।
‘मानसून और मानसून सत्र दोनों हों प्रोडक्टिव’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जैसे अच्छा मानसून देश के लिए जरूरी होता है, वैसे ही संसद का मानसून सत्र भी सकारात्मक और परिणाम देने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर दोनों बेहतर तरीके से काम करें तो देश का विकास और जनता का भला होगा।
युवाओं की उपलब्धियों का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप्स की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि देश के युवाओं ने दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।उन्होंने बताया कि हाल ही में एक भारतीय स्टार्टअप ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस स्टार्टअप की टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 साल थी, जो युवाओं की क्षमता और सोच को दिखाती है।
‘मैं 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा’
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं।” उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। विपक्ष का मानना है कि यह इशारा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर था, जिनकी उम्र 56 वर्ष है।
देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर भी बोले पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक विकास बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों के बीच भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।
गिनाईं सरकार की बड़ी उपलब्धियां
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में राजस्थान की नई ऑयल रिफाइनरी, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट और हाल ही में शुरू हुई ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां भारत की बढ़ती ताकत और तकनीकी क्षमता को दिखाती हैं।
विपक्ष से की सहयोग की अपील
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से अपील की कि संसद में हंगामे की जगह तथ्य और तर्क के आधार पर चर्चा हो। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर सार्थक बहस होनी चाहिए ताकि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चले और देशहित में महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकें।
