राजस्थान की सड़कों की सूरत जल्द ही बदलने वाली है…जिसके लिए राज्य के बुनियादी ढांचे को एक नया और मजबूत रूप देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। अमूमन देखा जाता है कि, सरकारें बजट में बड़े-बड़े वादे तो कर देती हैं, लेकिन उन्हें फाइलों से निकलकर जमीन पर आने में सालों लग जाते हैं। मगर इस बार कहानी थोड़ी अलग है।
भजनलाल सरकार ने प्रशासनिक सुस्ती को दरकिनार करते हुए बेहद तत्परता दिखाई है और बजट में किए गए वादों को समय पर धरातल पर उतारने के लिए कमर कस ली है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 29 प्रमुख जिलों में सड़कों की हालत सुधारने के लिए 8 सौ 82.54 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को वित्तीय मंजूरी दे दी है।
वहीं, इस फैसले का सीधा मकसद आम जनता के आवागमन को सुगम, सुरक्षित और आसान बनाना है। अब जानते हैं क्या है सरकार का पूरा प्लान? सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और बजटीय वित्तीय प्रबंधन के आपसी तालमेल से तैयार किए गए इस मेगा प्लान के तहत राजस्थान के अलग-अलग संभागों में कुल 137 सड़क निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के कार्यों को चुना गया है।
सरकारी सूत्रों की मानें तो वित्तीय मंजूरी मिलने के तुरंत बाद अब लोक निर्माण विभाग इन सभी स्वीकृत सड़कों के लिए बहुत जल्द ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि मानसून और आने वाले सीजन की शुरुआत से पहले-पहले कागजी कार्रवाई पूरी कर ली जाए, ताकि जमीन पर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके। अब बात करते हैं कि, किन 29 जिलों की तस्वीर बदलेगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इस योजना का खाका इस तरह खींचा गया है कि इसका सीधा फायदा राजस्थान के सुदूर ग्रामीण इलाकों और सीमावर्ती जिलों को मिले, जहां लंबे समय से अच्छी सड़कों की दरकार थी। इस योजना में शामिल किए गए 29 जिलों की सूची में पुराने जिलों के साथ-साथ नए गठित जिले भी शामिल हैं। जिनमें नफलौदी, जोधपुर, ब्यावर, अलवर, बाड़मेर, बालोतरा, दौसा, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, झुंझुनूं, करौली, नागौर, पाली, सवाई माधोपुर, सीकर, सलूम्बर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, जालोर, बारां, श्रीगंगानगर, झालावाड़, जयपुर, भरतपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ और धौलपुर।
वहीं, इस पूरी परियोजना के जरिए इन जिलों के ग्रामीण संपर्कों, राज्य राजमार्गों और मुख्य जिला सड़कों को आपस में जोड़ा जाएगा। जब ये सड़कें आपस में बेहतर ढंग से जुड़ेंगी, तो न केवल गांवों से शहरों तक पहुंचना आसान होगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और कारोबार को भी एक नई रफ्तार मिलेगी। इसका एक और बड़ा फायदा ये होगा कि अच्छी और चौड़ी सड़कें होने से आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भी काफी कमी आएगी।
राजस्थान में अक्सर ये देखा गया है कि बजट घोषणाओं के बाद प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरियों के चक्कर में काम महीनों-सालों तक अटका रहता है। लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार में ‘लेटलतीफी’ नहीं चलेगी। उन्होंने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आपसी समन्वय के साथ तुंरत निर्णय लें। सरकार का साफ मानना है कि बजट की कोई भी घोषणा सिर्फ कागजों या फाइलों की शोभा न बढ़ाए, बल्कि उसका सीधा और वास्तविक लाभ समाज के आखिरी पायदान पर बैठे व्यक्ति तक तय समय सीमा के भीतर पहुंचे।
PWD के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन 137 सड़क कार्यों की लिस्ट तैयार करते समय उन इलाकों को टॉप प्रायोरिटी (प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर) पर रखा गया है, जहां सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी थीं या जहां ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
इसके साथ ही, इस बार केवल सड़क बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि उसकी मजबूती और लाइफ पर भी फोकस है। सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। काम में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार विशेष निगरानी दल भी गठित करने जा रही है, जो समय-समय पर मौके पर जाकर काम की क्वालिटी की जांच करेंगे। कुल मिलाकर, 882 करोड़ रुपये से अधिक का ये प्रोजेक्ट राजस्थान के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अगर ये काम समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो ये राजस्थान के नागरिकों के लिए भजनलाल सरकार की तरफ से एक बड़ी राहत और सौगात होगी।
