बीजेपी MP सौमित्र खान का दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बीजेपी सांसद और वरिष्ठ नेता Soumitra Khan ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं और पार्टी नेतृत्व की मंजूरी मिलते ही वे पाला बदलने को तैयार हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे “बेबुनियाद” और “झूठ” बताया है।

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं, जिनमें से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद, बीजेपी के पास 12 और कांग्रेस के पास 1 सांसद है। ऐसे में सौमित्र खान का यह बयान राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।

सौमित्र खान का बड़ा दावा

तीन बार के लोकसभा सांसद Soumitra Khan ने मंगलवार (26 मई) को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि TMC के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं और बीजेपी के संपर्क में बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “तृणमूल के 20 सांसद हमारे संपर्क में हैं। अगर पार्टी नेतृत्व चाहे तो वे पाला बदलने के लिए तैयार हैं। अगर बीजेपी चाहे तो पूरी तृणमूल कांग्रेस अगले कुछ दिनों में समाप्त हो सकती है।” उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

TMC ने बताया ‘सरासर झूठ’

बीजेपी सांसद के इस दावे पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद Saugata Roy ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी मीडिया में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

सौगत राय ने कहा, “भाजपा और सौमित्र खान जो पत्रकारों को परोस रहे हैं, वह सरासर झूठ है। ऐसा कुछ भी नहीं होगा।” वहीं, TMC नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और बीजेपी केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए ऐसे बयान दे रही है।

दल-बदल कानून के कारण ‘20 सांसद’ संख्या अहम

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सौमित्र खान द्वारा “20 सांसद” का आंकड़ा यूं ही नहीं चुना गया। भारत के दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद यदि एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तभी वे अयोग्यता से बच सकते हैं। लोकसभा में TMC के 29 सांसद हैं। ऐसे में दो-तिहाई संख्या लगभग 19 से 20 सांसदों के आसपास बैठती है। यही वजह है कि बीजेपी सांसद के बयान को कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या TMC के भीतर सब कुछ ठीक नहीं?

इन अटकलों को बल इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। कई नेताओं ने संगठन और नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान विपक्ष को हमला बोलने का मौका दे रही है।

2021 चुनाव से पहले भी हुआ था बड़ा दलबदल

बंगाल की राजनीति में दलबदल कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले TMC के कई बड़े नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा था। हालांकि चुनाव में Mamata Banerjee की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद इनमें से कई नेता फिर TMC में लौट गए थे। लेकिन इस बार राजनीतिक परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं। बीजेपी अब राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन चुकी है और लगातार तृणमूल सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

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