मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के उन सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं, जहां से ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है। अमेरिका ने इन हमलों को “आत्मरक्षा” में की गई कार्रवाई बताया है। इस घटना के बाद पूरी दुनिया की नजरें इस इलाके पर टिक गई हैं, क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल का व्यापार करता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और UAE जैसे देशों का ज्यादातर तेल इसी समुद्री मार्ग से दुनिया भर में भेजा जाता है।
ईरान की मजबूत पकड़
ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वह इस जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से पर मजबूत नियंत्रण रखता है। ईरान के पास बंदर अब्बास और केश्म द्वीप जैसे बड़े बंदरगाह और सैन्य अड्डे हैं। यहां से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना समुद्री गतिविधियों पर नजर रखती है। ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि ईरानी बलों ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर ड्रोन, मिसाइल और छोटी नावों से हमला किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी मिसाइल साइटों, माइन्स बिछाने वाली नावों और अन्य सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया। हमलों के दौरान बंदर अब्बास इलाके में कई जोरदार धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को “आक्रामक हमला” बताया है। वहीं अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अपने जहाजों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई।
