अभी तो सिर्फ 3 रुपये महंगा हुआ है.... आगे इतने बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम ?

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में ईंधन और महंगा हो सकता है।

करीब चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई इस वृद्धि ने आम आदमी के साथ-साथ परिवहन और उद्योग जगत की चिंता भी बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। ऐसे हालात में भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें भारत की तेल विपणन कंपनियों पर भारी दबाव बना रही थीं। लंबे समय से कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए थीं, लेकिन अब उनके लिए नुकसान उठाना मुश्किल होता जा रहा था। इसी कारण सरकार को कीमतों में संशोधन करना पड़ा।

मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरमीत सिंह चावला का मानना है कि मौजूदा बढ़ोतरी पहले से ही अनुमानित थी। उन्होंने कहा कि अगर ब्रेंट क्रूड 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक तेल कंपनियां लगातार महंगे कच्चे तेल का बोझ उठा रही थीं। मौजूदा बढ़ोतरी से उन्हें कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन पूरी भरपाई अभी भी दूर है।

10 रुपये तक और बढ़ सकते हैं दाम!

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अभी हुई 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट के अनुसार, मौजूदा स्थिति में सरकारी तेल कंपनियों को नुकसान से उबरने के लिए आगे और कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों के सालाना EBITDA में लगभग 15 से 16 हजार करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है। इस हिसाब से हालिया बढ़ोतरी से कंपनियों को करीब 45 से 48 हजार करोड़ रुपये तक का फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो नुकसान की पूरी भरपाई के लिए कुल मिलाकर करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे भारतीय बाजार को प्रभावित करता है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर बना दिया है। अगर इस क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होती है, तो दुनिया भर में तेल की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले समय में भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ेगा।

महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ते रहे, तो आने वाले महीनों में महंगाई दर में भी उछाल देखने को मिल सकता है। खाद्य पदार्थों से लेकर निर्माण सामग्री और उपभोक्ता वस्तुओं तक की लागत बढ़ने की संभावना है। घरेलू बजट पर भी इसका असर साफ दिखाई देगा। पहले से महंगाई का सामना कर रहे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ साबित हो सकती है।

सरकार की भूमिका होगी अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सरकार की नीति सबसे अहम भूमिका निभाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो सरकार टैक्स में राहत देकर या अन्य उपायों के जरिए आम जनता को राहत देने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल तेल कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों की नजर वैश्विक बाजार पर टिकी हुई है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में जल्द नरमी नहीं आती, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

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