राजस्थान में NEET पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार सत्ता और सियासत के रसूखदार गलियारों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में हुई ताजा गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। कांग्रेस ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पेपर लीक कांड का मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा हुआ पदाधिकारी है। इस आरोप के बाद अब यह मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि “भ्रष्टाचार बनाम जीरो टॉलरेंस” की राजनीतिक लड़ाई बन चुका है।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और पोस्टर साझा कर भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। इन तस्वीरों में दिनेश बिवाल भाजपा के झंडे, बैनर और कई बड़े नेताओं के साथ मंच साझा करता दिखाई दे रहा है। एक पोस्टर में उसने खुद को “जिला मंत्री, जयपुर जिला देहात, भाजपा युवा मोर्चा” बताया है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अपने ही करीबी लोगों को बचाने की कोशिश कर रही थी।
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि, राजस्थान सरकार ने जानबूझकर 9 दिनों तक FIR दर्ज नहीं की और मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, अगर आरोपी किसी विपक्षी दल से जुड़ा होता, तो सरकार अब तक बुलडोजर चलाने की बात कर रही होती… कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति सिर्फ भाषणों तक सीमित है, जबकि हकीकत में पेपर माफिया सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं।
दिनेश बिवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस सूत्रों और जांच एजेंसियों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उसने कथित तौर पर 30 लाख रुपये में NEET का पेपर खरीदा था। इसके बाद उसने ये पेपर कई व्हाट्सएप ग्रुप्स और अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। जांच एजेंसियों का मानना है कि दिनेश इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था, जो कोचिंग संस्थानों, एजेंटों और छात्रों के बीच “पुल” का काम करता था।
बताया जा रहा है कि पेपर लीक नेटवर्क राजस्थान के कई जिलों तक फैला हुआ था और इसका संबंध दूसरे राज्यों से भी जुड़ सकता है। जांच में जयपुर, सीकर और आसपास के इलाकों में सक्रिय नेटवर्क की भूमिका सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, कई कोचिंग सेंटर और बिचौलिए छात्रों को मोटी रकम लेकर परीक्षा से पहले कथित “गेस पेपर” उपलब्ध करवाते थे, जो बाद में असली पेपर निकलता था।
कांग्रेस के आरोपों को और बल दिनेश बिवाल की वायरल तस्वीरों और पुराने होर्डिंग्स से मिल रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही इन तस्वीरों में वो भाजपा नेताओं के साथ कार्यक्रमों में नजर आ रहा है। इससे भाजपा रक्षात्मक स्थिति में आ गई है। विपक्ष अब इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जिस सरकार ने पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई का दावा किया था, उसी के भीतर ऐसे लोग सक्रिय पाए जा रहे हैं।
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि आरोपी का किसी भी राजनीतिक दल से संबंध हो, कानून अपना काम करेगा। राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि अक्सर ऐसे मामलों में पार्टियां आरोपी से दूरी बना लेती हैं और उसे पुराना कार्यकर्ता बताकर पल्ला झाड़ लेती हैं।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन लाखों छात्रों का हुआ है, जिन्होंने कठिन मेहनत के बाद NEET परीक्षा दी थी… परीक्षा रद्द होने से करीब 24 लाख छात्र मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। छात्रों और अभिभावकों में पहले ही नाराजगी थी, लेकिन अब इस मामले में राजनीति के प्रवेश ने हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
अगर जांच में दिनेश बिवाल का भाजपा से सीधा संबंध साबित होता है, तो ये राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है कि क्या वो अपने ही करीबी लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई कर पाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला राजस्थान की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।
