काशी विश्वनाथ धाम में गरजे CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ के दौरान सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास और अटूट जिजीविषा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने के कई प्रयास किए, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो सके।

उनके संबोधन का मुख्य सार ये था कि सनातन केवल भौतिक ढांचों या मंदिर की दीवारों में सीमित नहीं है, बल्कि ये भारत की अंतरात्मा और चेतना में रचा-बसा है। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि, मोहम्मद गोरी से लेकर औरंगजेब तक, कई हमलावरों ने हमारे पवित्र स्थलों को निशाना बनाया।

औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर वहां गुलामी का प्रतीक खड़ा किया, लेकिन वो भारत की आत्मा को खंडित नहीं कर सका। योगी आदित्यनाथ ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन्होंने भी सनातन को मिटाने का दुस्साहस किया, वे खुद काल के गाल में समा गए और आज उनका नाम लेने वाला भी कोई नहीं है। इसके विपरीत, सनातन संस्कृति आज भी अपने पूरे वैभव के साथ जीवंत है।

काशी और सोमनाथ के अंतर्संबंधों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन्हें भारतीय सभ्यता के ‘अमर ज्योति स्तंभ’ बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर में मां गंगा के तट पर स्थित बाबा विश्वनाथ और पश्चिम में सागर तट पर विराजमान प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ भारत की एकता के प्रतीक हैं। सोमनाथ मंदिर का इतिहास हमें सिखाता है कि विनाश क्षणिक होता है और सृजन शाश्वत, महमूद गजनवी ने 17 बार आक्रमण किया, उसेक बावजूद सोमनाथ का वैभव आज पूरी दुनिया के सामने है। ये इस बात का प्रमाण है कि सनातन को कभी पराजित नहीं किया जा सकता।

योगी आदित्यनाथ ने इस पुनर्जागरण का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया।उन्होंने कहा कि, आज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना साकार हो रही है। चाहे वो सोमनाथ मंदिर का सुदृढ़ीकरण हो, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हो, महाकाल लोक का निर्माण हो या अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर की स्थापना, ये सभी स्थल भारत के राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनरुत्थान के शंखनाद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से ही आज उत्तर प्रदेश समेत पूरा देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जुड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार तत्कालीन सरकार के विरोध और तमाम चुनौतियों के बावजूद सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा का संकल्प लिया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद उस समारोह का हिस्सा बने। सीएम योगी ने उन शक्तियों पर भी तंज कसा जो आज भी सांस्कृतिक विकास में बाधा डालती हैं, जैसा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के समय देखा था।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोमनाथ में की जा रही विशेष महापूजा और कुंभाभिषेक का सजीव प्रसारण देखा। इस मौके पर काशी विद्वत परिषद के विद्वान, राज्य सरकार के मंत्रीगण और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। महोत्सव का माहौल तब और भी भक्तिमय हो गया जब नामचीन कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। ये आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विजय और स्वाभिमान का एक सशक्त उद्घोष बनकर उभरा।

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By admin