सहकारिता से समृद्धि: गुजरात की विरासत और आधुनिक भारत का संकल्प

इफको के चेयरमैन दिलीप संघानी ने खेती बैंक अहमदाबाद में देश के विभिन्न स्थानों से पधारे निदेशकों एवं बोर्ड सदस्यों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि, गुजरात स्थापना दिवस केवल कोई तकनीकी दिवस नहीं है। “गुजरात” शब्द का उच्चारण करते ही संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का एक सकारात्मक वातावरण निर्मित होता है। गुजराती भाषा भी एक स्पष्ट संदेश देती है। अन्य भाषाओं के मूलाक्षरों (अल्फाबेट) की तुलना में गुजराती भाषा में स्वर और व्यंजनों की समृद्ध संरचना है, जिससे प्रत्येक शब्द का अर्थ अधिक स्पष्टता से अभिव्यक्त होता है।
सहकारिता से समृद्धि: गुजरात की विरासत और आधुनिक भारत का संकल्प

उदाहरण स्वरूप, जहां अन्य भाषाओं में “आंटी” शब्द के अंतर्गत मामी, मौसी, चाची, फूई जैसे सभी संबंध समाहित हो जाते हैं, वहीं गुजराती भाषा में प्रत्येक संबंध के लिए अलग-अलग सम्मानजनक संबोधन प्रचलित हैं। इसके साथ ही दिलीप संघानी ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन भारतीय सहकारी आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय द्वारा लागू किए गए नए मॉडल बायलॉज सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं।

सहकारिता से समृद्धि: गुजरात की विरासत और आधुनिक भारत का संकल्प

वहीं उन्होंने कहा कि, इफको और खेती बैंक की स्थापना उदयभान सिंह द्वारा की गई, जबकि अमूल और गुजकोमासोल की स्थापना त्रिभुवनदास पटेल ने की थी। गुजरात के इन महान सहकारी नेताओं द्वारा स्थापित संस्थाएं आज केवल राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत का नाम गौरवान्वित कर रही हैं। अंत में दिलीप संघानी ने कहा कि, वर्तमान समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह “सहकार से समृद्धि” के संकल्प के साथ देश के सहकारी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

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