Yuvraj drown: किसकी लापरवाही से डूबा युवराज ?
सामने एक व्यक्ति पानी में डूब रहा था वो चीख चीख कर ये कह रहा था कि मुझे बचा लो मुझे बचा लो…. और प्रशासन के अधिकारी बाहर खड़े उसे देख रहे थे और ये कहकर मामला टाल रहे थे कि पानी ठंडा है सरिए लगे हुए है….क्या किसी व्यक्ति की जान की प्रशासन की आंखों में कोई अहमियत नहीं है….मौके पर पुलिस SDRF और दमकल मौजूद थी लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाया गया…क्योंकि पानी में डूबने वाला व्यक्ति कोई वीआईपी नहीं था…ना ही उसकी कोई ऊपर के अधिकारियों से पहचान थी….
और सिर्फ इसी चक्कर में एक 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की मौत हो गई…और प्रशासन के अधिकारी वहां हाथों पर हाथ रख कर उसकी मौत का तमाशा देखते रहे….ये घटना है नोएडा के पॉश इलाकों में गिने जाने वाले सेक्टर-150 की…. इस दर्दनाक घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आइए आपको पूरे मामले की जानकारी देते है…आधी रात को 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक निर्माणाधीन मॉल के खुले बेसमेंट में गिर गई, जहां बारिश का पानी भरा हुआ था। इस हादसे में युवराज की डूबकर मौत हो गई। लेकिन यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं थी बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही और आपात स्थिति में प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण बनकर सामने आई
हादसा रात करीब 12 बजकर 2 मिनट पर हुआ, जब युवराज की कार अचानक बेसमेंट में बने गहरे गड्ढे में जा गिरी। बेसमेंट में भारी मात्रा में पानी भरा था। कार गिरते ही युवराज ने महज तीन मिनट के भीतर अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई। फोन पर वह लगातार कहता रहा—“पापा मुझे बचा लो।” पिता कुछ ही देर में मौके के लिए निकल पड़े और रात करीब 12 बजकर 40 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके बावजूद अगले कई घंटों तक युवराज को बचाया नहीं जा सका।
पिता के मुताबिक, उन्होंने रात करीब 12 बजकर 20 मिनट पर पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस लगभग पौने एक बजे घटनास्थल पर पहुंची। इसके करीब 10 मिनट बाद दमकल विभाग की टीम आई। SDRF की टीम रात करीब सवा दो बजे पहुंची। सुबह करीब 4 बजकर 30 मिनट पर युवराज का शव पानी से बाहर निकाला जा सका। इस पूरी अवधि में युवराज बेसमेंट में फंसा रहा और धीरे-धीरे उसकी जान चली गई।
घटनास्थल पर मौजूद एक डिलीवरी बॉय मोनिंदर ने जो दावे किए हैं, उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोनिंदर के अनुसार, जब वह मौके पर पहुंचा तो वहां पुलिस, फायर ब्रिगेड और अन्य अधिकारी मौजूद थे, लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं था। युवराज अंदर मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन सभी लोग बाहर खड़े तमाशबीन बने हुए थे। मोनिंदर ने बिना देरी किए अपनी कमर में रस्सी बांधी और पानी में छलांग लगा दी। उसने काफी देर तक युवराज को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
डिलीवरी बॉय के मुताबिक, अधिकारी यह जांचने में लगे थे कि पानी कितना ठंडा है और उसमें सरिया या अन्य खतरनाक चीजें तो नहीं हैं। अधिकारियों को खुद के घायल होने का डर था। किसी भी सरकारी टीम ने जोखिम उठाकर पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसी दौरान 27 साल का एक युवक तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा बैठा।
यह सवाल लगातार उठ रहे हैं कि अगर मौके पर पुलिस, दमकल और SDRF मौजूद थी, तो किसी ने रेस्क्यू ऑपरेशन तत्काल क्यों नहीं शुरू किया। क्या SOP और संभावित खतरे इंसानी जान से ज्यादा अहम हो गए थे। अगर पानी में सरिया होने की आशंका थी, तो रस्सी और सुरक्षा उपकरणों के साथ उतरने की कोशिश क्यों नहीं की गई। अगर ठंडे पानी या जोखिम का डर था, तो इन एजेंसियों को विशेष प्रशिक्षण किस लिए दिया जाता है।
युवराज कोई वीआईपी नहीं था। न उसके पास कोई सिफारिश थी और न ही उसका नाम किसी प्राथमिकता सूची में था। वह एक आम नागरिक था, एक बेटा था, जो आखिरी बार अपने पिता को पुकार रहा था। पिता सामने खड़े होकर अपने बेटे को डूबते हुए देखते रहे और पूरा सिस्टम बेबस नजर आया।
इस मामले ने राजनीतिक स्तर पर भी हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय SIT के गठन के निर्देश दिए हैं। मेरठ के कमिश्नर के नेतृत्व में गठित SIT में एडीजी जोन मेरठ और PWD के चीफ इंजीनियर को शामिल किया गया है। टीम को पांच दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को पद से हटा कर वेटिंग में डाल दिया गया है। क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर को हटा दिया गया है और वरिष्ठ प्रबंधक व प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दो डेवलपर्स के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।
घटना के बाद मौके पर सीमेंटेड बैरिकेड लगाए जा रहे हैं और स्ट्रीट लाइट्स को दुरुस्त कराया जा रहा है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम बहुत देर से उठाए गए। कुछ दिन पहले इसी गड्ढे में एक ट्रक गिरा था, जिसमें ड्राइवर ने पानी में कूदकर जान बचाई थी और वहां से गुजर रहे लोगों ने उसकी मदद कर दी थी।
इसके बावजूद नोएडा अथॉरिटी ने कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए।
अब सवाल सिर्फ ये है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के घटने का इंतजार कर रहा था….

