Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने त्यागा अन्न-जलShankaracharya Swami Avimukteshwarananda: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने त्यागा अन्न-जल

Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने त्यागा अन्न-जल

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से बड़ी खबर सामने आ रही है। माघ मेला और मौनी अमावस्या महास्नान पर्व के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान से वंचित रह गए। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने मौन व्रत धारण किया और अन्न-जल का त्याग कर दिया। बताया जा रहा है कि सोमवार को वे अपनी आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। रविवार को माघ मेला क्षेत्र में दिनभर शंकराचार्य की पालकी को रोकने को लेकर विवाद गर्माया रहा। पुलिस-प्रशासन द्वारा पालकी रोकने की घटना से शंकराचार्य का गुस्सा भड़का और उनका विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।

घटना उस समय हुई जब शंकराचार्य पालकी पर बैठकर संगम स्नान के लिए आगे बढ़ रहे थे। मेला क्षेत्र में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने संगम तट पर बैरिकेडिंग लगाई थी। पुलिस अधिकारियों ने शंकराचार्य को संगम नोज पर पालकी से उतरकर पैदल स्नान करने के लिए कहा। इस दूरी में केवल 50 मीटर का फासला था। हालांकि शंकराचार्य और उनके अनुयायियों ने इस निर्देश का विरोध किया।

उनका कहना था कि पिछले 40 वर्षों से वे संगम स्नान कर रहे हैं और शंकराचार्य बनने के बाद पिछले तीन वर्षों से पालकी पर ही आते हैं, ताकि श्रद्धालु दूर से दर्शन कर सकें और भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
पालकी रोकने के बाद समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और हो-हल्ला शुरू हो गया। यह खींचतान संगम वाच टावर तक फैल गई।

करीब तीन घंटे तक चले संघर्ष और विरोध के बावजूद प्रशासन ने कोई समझौता नहीं किया। इसके बाद शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए वापस लौट गए। नाराज शंकराचार्य ने त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य शिविर के बाहर धरना शुरू किया। सूर्यास्त के बाद उन्होंने मौन व्रत धारण किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनके अनुयायियों ने भी अन्न-जल का त्याग किया।

शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिना वर्दी के पुलिस वाले उन्हें वहां से ले गए और उन्होंने चेतावनी दी कि केवल तब वे स्नान करेंगे जब उन्हें ससम्मान ले जाया जाएगा। पिछले कुम्भ में हुए भगदड़ के लिए उन्होंने सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इस बार भी उन्हें अपमानित किया गया। शंकराचार्य ने यहां तक कहा कि यदि उनकी उपेक्षा की गई तो वे मेला छोड़ देने की घोषणा कर सकते हैं।

प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि शंकराचार्य 200 अनुयायियों के साथ संगम नोज पर जाना चाहते थे। प्रशासन ने कहा कि पालकी से उतरकर केवल 20 अनुयायियों के साथ स्नान करें। हालांकि शंकराचार्य ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ। कुछ अनुयायियों को हटाया गया, लेकिन क्योंकि वे संत थे, उन्हें कोई हिंसा नहीं की गई।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि माघ मेले में नई परंपरा शुरू नहीं होगी और पूरे मामले का वीडियो रिकॉर्ड किया गया है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पालकी को संगम तट पर आगे बढ़ने से रोकने का निर्देश मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने दिया। आम श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने शंकराचार्य और उनके अनुयायियों से समझौता करने की कोशिश की, लेकिन मामला बढ़ गया।

इस बीच डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज भी मौके पर पहुंचे और शंकराचार्य से पैदल स्नान के लिए आग्रह किया, लेकिन उन्होंने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। इससे पुलिस बल और अनुयायियों के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई।

घटना के बाद शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि संगम स्नान उनके लिए ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का है। उन्होंने कहा कि पिछले सालों में वे इसी मार्ग और पालकी के माध्यम से श्रद्धालुओं तक दर्शन पहुंचाते रहे हैं। पालकी रोकने और उन्हें पैदल करने का निर्देश उन्हें अपमानजनक लगा। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस की यह कार्रवाई उनके धार्मिक कर्तव्य में बाधा डालने के समान है।

समर्थकों ने भी पालकी को रोकने के निर्णय का विरोध किया और कहा कि यह परंपरा को तोड़ने का प्रयास है। धक्का-मुक्की और हो-हल्ले के बीच उन्होंने शांति बनाए रखने का भी प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की स्थिति ने तनाव बढ़ा दिया।

इस पूरे विवाद के बीच प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में पुलिस-प्रशासन और धार्मिक नेतृत्व के बीच तनाव की स्थिति बन गई। शंकराचार्य के मौन व्रत और अन्न-जल का त्याग करने की खबर ने पूरे मेला क्षेत्र में चर्चा बढ़ा दी है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, पुलिस फोर्स और अधिकारियों की मौजूदगी को सुनिश्चित किया।