BJP MLA's daughter declared APOBJP MLA's daughter declared APO

BJP MLA’s daughter declared APO: BJP विधायक की बेटी को किया APO, फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी लेने का आरोप!

राजस्थान की ब्यावर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक शंकर सिंह रावत की बेटी और आर.ए.एस-2018 बैच की अधिकारी कंचन सिंह चौहान एक बार फिर चर्चा में हैं। मंगलवार शाम राजस्व मंडल, अजमेर ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए उन्हें एपीओ यानी के (Awaiting Posting Order) कर दिया है। आदेश के अनुसार अब कंचन अपनी उपस्थिति राजस्व मंडल अजमेर में दर्ज कराएंगी। इससे पहले वे भीलवाड़ा जिले के करेडा तहसील में बतौर नायब तहसीलदार थीं।

WhatsApp Image 2025 12 24 at 2.17.57 PM 3

ये कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कंचन सिंह चौहान के खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर आर.ए.एस में चयन पाने का मामला जांच के घेरे में है। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री और एस.ओ.जी यानी के (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) तक ये प्रकरण पहुंच चुका है

 

ब्यावर निवासी फणीश कुमार सोनी ने 12 अगस्त 2025 को कंचन चौहान के खिलाफ सरकार को शिकायत भेजी थी। उनका आरोप है कि, कंचन ने आर.ए.एस परीक्षा में चयन पाने के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पेश किया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि उनका दोबारा मेडिकल परीक्षण करवाया जाए, जिसके लिए किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।

फणीश सोनी के अनुसार, कंचन ने लाभ उठाकर प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई, जो योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने ये भी अनुरोध किया कि जिन डॉक्टर ने ये प्रमाण पत्र जारी किया था, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। जानकारी के मुताबिक वो डॉक्टर अब स्वैच्छिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं

मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की गंभीरता देखते हुए जांच की जिम्मेदारी राजस्थान एस.ओ.जी को सौंपी है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार अब तक एस.ओ.जी ने अपनी रिपोर्ट राजस्व मंडल को नहीं सौंपी है। जांच लंबित रहने के बावजूद विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए कंचन को APO किया है, ताकि किसी भी तरह की प्रशासनिक जटिलता न बने

WhatsApp Image 2025 12 24 at 2.17.57 PM 1

राजस्व मंडल ने इस बीच 2018 बैच सहित पिछले पांच वर्षों में दिव्यांग श्रेणी के आधार पर चयनित सभी उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों की दौबारा जांच करवाई थी। इस जांच में कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए गए थे।

कंचन चौहान ने 2018 में आर.ए.एस परीक्षा पास की थी। उस समय उनकी रैंक करीब 600 बताई गई थी। चयन के बाद 27 दिसंबर 2021 को उन्हें पहली पोस्टिंग भीलवाड़ा के गुलाबपुरा क्षेत्र में नायब तहसीलदार के रूप में मिली थी। पिछले एक वर्ष से वो करेडा तहसील में कार्यरत थीं।

कंचन ने इस परीक्षा से पहले भी दो बार प्रयास किया था। उन्होंने 2013 और 2016 में आरएएस परीक्षा दी थी। पहले प्रयास में वे प्री परीक्षा क्लियर नहीं कर सकीं। दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स पास हुआ, लेकिन मेन परीक्षा में नाम नहीं आया। तीसरे प्रयास यानी 2018 में उन्होंने इंटरव्यू तक पहुंचकर सफलता हासिल की।

WhatsApp Image 2025 12 24 at 2.17.57 PM 2

मामले की विशेषता ये है कि, कंचन के पिता शंकर सिंह रावत भाजपा के विधायक हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में ये मामला और संवेदनशील हो गया है। विपक्ष लगातार सरकार से मांग कर रहा है कि इस प्रकरण की जांच निष्पक्ष हो और किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं आने दिया जाए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे विपक्ष की साजिश बता रहे हैं।

 

WhatsApp Image 2025 12 24 at 2.17.57 PM 5

राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “फिलहाल एपीओ आदेश प्रशासनिक औपचारिकता के तहत जारी किया गया है। एसओजी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।”

इस पूरे विवाद ने आर.ए.एस चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो ये मामला न केवल कंचन चौहान बल्कि भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं, कंचन पक्षकारों की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया है।