Pollution hits Delhi: दिल्ली में प्रदूषण की मारPollution hits Delhi: दिल्ली में प्रदूषण की मार

Pollution hits Delhi: दिल्ली में प्रदूषण की मार

देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हर गुजरते दिन के साथ एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI खतरनाक स्तर की ओर बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। खराब होती हवा का सीधा असर आम लोगों की सेहत और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में गुरुवार से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP का चौथा चरण लागू कर दिया गया है। GRAP-4 के तहत दिल्ली में कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इन नियमों के लागू होने के बाद आम जनता को जहां कुछ राहत की उम्मीद है, वहीं कई लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

GRAP-4 के तहत दिल्ली में अब केवल BS-6 मानकों वाले वाहनों को ही एंट्री की अनुमति दी गई है। पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा सरकार ने एक और अहम फैसला लेते हुए ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम को सख्ती से लागू कर दिया है। इस नियम के तहत अगर किसी वाहन के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट यानी PUCC नहीं है, तो उसे पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दी जाएगी।

सरकार के इस फैसले का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। कई पेट्रोल पंपों पर बिना PUCC दिखाए वाहन चालकों को फ्यूल देने से मना किया जा रहा है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन लोगों को जिन्होंने समय पर प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं बनवाया था। कई वाहन चालक पेट्रोल पंप से खाली हाथ लौटते नजर आए।

हालांकि, सरकार के इस कदम को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि अचानक नियम लागू होने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, कई लोग इसे सही फैसला मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर प्रदूषण को नियंत्रित करना है तो ऐसे सख्त कदम जरूरी हैं। प्रदूषण कम होने से न सिर्फ लोगों की सेहत बेहतर होगी बल्कि वाहनों की परफॉर्मेंस और उम्र पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू होने के बाद दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है। PUC सेंटर संचालकों का कहना है कि नियम लागू होने के बाद प्रदूषण जांच कराने वालों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। सुबह से ही लोग अपनी गाड़ियों की जांच कराने के लिए कतार में खड़े नजर आ रहे हैं। कई केंद्रों पर देर रात तक काम किया जा रहा है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

हालांकि नियमों के सख्त होने के बावजूद कुछ जगहों पर लापरवाही भी सामने आ रही है। गाजीपुर बॉर्डर स्थित एक पेट्रोल पंप पर अधूरी तैयारियां देखने को मिलीं। यहां पेट्रोल पंप कर्मचारियों को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि PUCC कैसे चेक किया जाना है। बिना सर्टिफिकेट की जांच किए ही कई वाहनों को फ्यूल दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर कोई भी सरकारी अधिकारी या इंफोर्समेंट टीम मौजूद नहीं थी, जिससे नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

GRAP-4 के तहत सरकार ने प्रदूषण को कम करने के लिए कई अन्य सख्त कदम भी उठाए हैं। दिल्ली में प्राइवेट और सरकारी संस्थानों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम की जा सके। इसके अलावा निर्माण सामग्री ढोने वाले सभी प्रकार के वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे धूल और कण प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जा रही है।

बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्राइमरी स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी गई हैं और ऑनलाइन क्लासेज चलाई जा रही हैं। सरकार का मानना है कि छोटे बच्चों पर प्रदूषण का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है, इसलिए यह कदम जरूरी है।

दिल्ली में पिछले एक हफ्ते से प्रदूषण का स्तर लगातार खराब बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार हवा की गति कम होने और पराली जलाने जैसी गतिविधियों के चलते हालात और बिगड़े हैं। इसी गंभीर स्थिति को लेकर आज संसद में भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

दिल्ली की जहरीली हवा एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या सिर्फ आपातकालीन उपाय ही काफी हैं या प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की जरूरत है। फिलहाल GRAP-4 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों के बीच राजधानी के लोग साफ हवा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।