RAJASTHAN: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने क्यों कहा: “मुख्यमंत्री को लोग सीरियस नहीं लेते”
नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने एक बार फिर राजस्थान की राजनीति और मौजूदा भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनके निशाने पर सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार की कार्यशैली रही। बेनीवाल का कहना है कि लोग मुख्यमंत्री को गंभीरता से नहीं ले रहे और खुद उन्हें भी ये समझ नहीं आ रहा कि असल में सरकार चला कौन रहा है। उनके मुताबिक, सत्ता के केंद्र में बैठे कुछ करीबी लोग राज्य के संसाधनों को लूटने में जुटे हैं और सरकार की छवि तेजी से गिर रही है।
बेनीवाल ने दावा किया कि, पेपर लीक और आर.पी.एस.सी से जुड़ी भर्तियों के मामलों में भाजपा सरकार ने विपक्ष में रहते जो वादे किए थे, सत्ता में आने के बाद उनसे यू-टर्न ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि, कथनी और करनी में भारी अंतर है और इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों एक जैसी दिख रही हैं। जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बदहाल है, खुद मुख्यमंत्री को कई बार धमकियां मिल चुकी हैं, फिर भी अपराध, नशे का कारोबार और गैंगवार पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। उनके शब्दों में, “पंजाब से भी ज्यादा नशा अब राजस्थान में फैल चुका है,” जो प्रशासन की नाकामी को दिखाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी रहे कुछ अफसरों पर भी बेनीवाल ने गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, जो अधिकारी पहले फोन टेपिंग और राजनीतिक उपयोग के लिए बदनाम थे, वही अब नई सरकार के चहेते बनकर भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार में सक्रिय हैं। बेनीवाल ने कहा कि, उनकी पार्टी RLP के पास विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है, इसके बावजूद वे सड़क से लेकर संसद तक जनता के मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने खुद को ऐसी आवाज़ बताया जो बिना सत्ता संरचना में हिस्सेदारी लिए आमजन के हक के लिए लड़ रही है।
हवाई यात्राओं को लेकर भी बेनीवाल ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने इंडिगो एयरलाइंस की उड़ानों में हो रही लगातार गड़बड़ियों और रद्द होने की घटनाओं को “आम यात्रियों के साथ अन्याय” बताया। उनके अनुसार, जब संसद का सत्र चल रहा हो और ऐसे समय में विमान सेवाएं अनिश्चित हो जाएं, तो ये सीधे-सीधे सरकार की कार्यकुशलता को चुनौती है। बेनीवाल का कहना है कि सरकार को एयरलाइन के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि नागरिकों का भरोसा बना रहे। साथ ही, उन्होंने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत को भी चिंताजनक बताया और संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को संसद के भीतर जोरदार तरीके से उठाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेनीवाल ने भारतीय युवाओं के मसले को जोड़ा। उन्होंने लोकसभा के शून्यकाल में रूस में फंसे 61 भारतीय युवकों का मुद्दा उठाकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ये मामला उस समय सामने आया है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा तय है। बेनीवाल का तर्क है कि जब शीर्ष स्तर के रिश्तों की चर्चा हो रही हो, उसी समय वहां फंसे भारतीय युवाओं की सुरक्षित वतन वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, ये केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय चिंता का विषय है, जो सरकार की संवेदनशीलता की असली परीक्षा लेता है।
कुल मिलाकर, हनुमान बेनीवाल ने एक साथ कई मोर्चों पर राज्य और केंद्र सरकार को घेरा—राजस्थान की आंतरिक कानून-व्यवस्था, भर्ती घोटाले, आर्थिक मुद्दे, हवाई सेवाओं की अव्यवस्था और विदेश में फंसे भारतीयों का मुद्दा। उनकी ये आक्रामक स्टाइल उन्हें प्रदेश की मुख्यधारा पार्टियों से अलग तो दिखाती ही है, साथ ही ये संदेश भी देती है कि वे खुद को “विपक्ष के भीतर एक वैकल्पिक आवाज़” के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

