Winter session of Parliament will begin on December 1: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से होगा शुरूWinter session of Parliament will begin on December 1: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से होगा शुरू

Winter session of Parliament will begin on December 1: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से होगा शुरू

 

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है, और उससे ठीक एक दिन पहले रविवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों के प्रमुख नेता शामिल हुए। यह बैठक हर सत्र से पहले की तरह औपचारिक रूप से सहयोग और संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, ताकि सदन को सुचारू रूप से चलाया जा सके। लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था, क्योंकि बैठक के केंद्र में SIR का मुद्दा छाया रहा, जिसे लेकर विपक्ष काफी आक्रामक तेवर दिखाता नजर आया।

बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। नेता सदन राज्यसभा जे. पी. नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल और एल. मुरुगन भी मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और जयराम रमेश, टीएमसी के डेरेक ओ’ब्रायन, आरजेडी के मनोज झा, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, बीजेडी के सस्मित पात्रा, अपना दल की अनुप्रिया पटेल समेत कई नेताओं ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य था—आगामी सत्र में चर्चा के लिए प्रस्तावित बिलों और मुद्दों की जानकारी सभी दलों तक पहुंचाना और सहयोग का वातावरण तैयार करना।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक में साफ कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की ओर से संवाद का दरवाज़ा खुला है और सत्र की कार्यवाही को बाधित होने से बचाने के लिए सभी पक्षों से सहयोग की उम्मीद है।

लेकिन दूसरी ओर विपक्ष SIR के मुद्दे पर पहले से ही आक्रामक था। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस ने इस मसले को सबसे पहले उठाया और सरकार से सवाल किया कि यह मामला क्या है और इस पर स्पष्टता क्यों नहीं दी जा रही। इसके बाद समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने इस मुद्दे को बेहद तीखे अंदाज़ में उठाया और सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सत्र से पहले ही सरकार पर लगातार हमला बोलना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ “वोट चोरी” नहीं, बल्कि “वोट की डकैती” हो रही है, और यह मामला संसद में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि देश में आतंकी घटनाएं बढ़ रही हैं, दिल्ली में ब्लास्ट हो रहे हैं, और इन मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा। साथ ही उन्होंने विदेश नीति से जुड़े सवालों को भी संसद में उठाने की बात कही।

बैठक में SIR का मुद्दा जहां विपक्ष की प्राथमिकता में दिखा, वहीं जेडीयू के नेता संजय झा ने इस मुद्दे पर उठ रही आशंकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में भी विपक्ष ने SIR पर हंगामा किया था, लेकिन उससे उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ। संजय झा ने बिहार चुनाव नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि SIR को लेकर जो शंकाएं विपक्ष जता रहा है, वे आधारहीन हैं और चुनावी नतीजे इसका जवाब हैं।

सत्र का शेड्यूल पहले ही तय किया जा चुका है। यह शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। कुल 19 दिनों की अवधि में 15 बैठकें होंगी। इस सत्र में सरकार 10 नए बिल पेश करने की तैयारी में है, जिनमें एटॉमिक एनर्जी बिल भी शामिल है। इसके अलावा सरकार कई लंबित विधेयकों पर चर्चा और पारित कराने की कोशिश कर सकती है। लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता SIR का मुद्दा रहेगा, और वह इसी आधार पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

बैठक में मौजूद कई नेताओं ने संकेत दिया कि अगर सरकार SIR पर स्पष्टता नहीं देती, तो आगामी सत्र में जमकर हंगामा होगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए अवरोध पैदा कर रहा है। संसद का शीतकालीन सत्र परंपरागत रूप से कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार राजनीतिक तापमान पहले से काफी ज्यादा है।

सर्वदलीय बैठक के बाद मिले संकेत बताते हैं कि सरकार सत्र को सुचारू रूप से चलाना चाहती है, लेकिन विपक्ष ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 1 दिसंबर से शुरू होने वाला शीतकालीन सत्र किस दिशा में आगे बढ़ता है और संसद का माहौल कितना गरम या शांत रहता है।