Sanatan conference held in Saharanpur: सहारनपुर गांव रणदेवा में हुआ सनातन सम्मेलनSanatan conference held in Saharanpur: सहारनपुर गांव रणदेवा में हुआ सनातन सम्मेलन

Sanatan conference held in Saharanpur: सहारनपुर गांव रणदेवा में हुआ सनातन सम्मेलन

सहारनपुर के रणदेवा गांव में आयोजित सनातन सम्मेलन के दौरान उस समय माहौल अचानक बदल गया, जब गाजियाबाद के लोनी से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने मंच से एक बेहद विवादित बयान दे दिया। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक समरसता बताया गया था, लेकिन गुर्जर के तीखे और उग्र शब्दों ने पूरे आयोजन को राजनीतिक चर्चाओं और विवादों के केंद्र में ला दिया।

मंच पर आते ही नंद किशोर गुर्जर ने सबसे पहले उन लोगों पर निशाना साधा, जिन्हें वे धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वाला मानते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग किताबें पढ़कर देवी-देवताओं पर मनगढ़ंत टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने “मौर्य” नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष किया और कहा कि ऐसे लोगों को ‘ठीक करना पड़ेगा’। दर्शकों के बीच बैठे संतों, ग्रामीणों और महिलाओं ने एक-दूसरे की ओर देखा, और फिर कई जगहों से तालियां भी सुनाई दीं।

इसके बाद गुर्जर ने वह बयान दिया, जिसने पूरे पंडाल को कुछ पलों के लिए स्तब्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ संतों का कहना है कि गाय काटने वाले को हाथ जोड़कर समझाना चाहिए, लेकिन उनका कहना है कि “गाय काटने वाले की गर्दन काट दो।” उन्होंने आगे कहा कि गाय हमारी मां है, और उसकी रक्षा हर बेटा करेगा। उनके इस बयान पर भीड़ के एक हिस्से ने तालियां बजाईं, जबकि कई लोग चुपचाप खड़े होकर यह सब सुनते रहे।

अपराध और सुरक्षा को लेकर बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि सहारनपुर में जितने ‘जेहादी’ हैं, उतने तो लोनी की उनकी चार गलियों में पहले मौजूद थे, लेकिन अब किसी की हिम्मत नहीं होती कि उंगली उठा सके। उन्होंने कहा कि पहले दिनदहाड़े गाय काटी जाती थी, बेटियों को उठाया जाता था, और गोलियां चलाई जाती थीं। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उनके अनुसार, आज लोनी में महिलाएं रात दो बजे तक बिना डर के घूम सकती हैं।

नंद किशोर गुर्जर ने दावा किया कि लोनी एक समय अपराध का गढ़ था, और इसी विषय पर फिल्म तक बनाई गई थी, लेकिन अब वहां 6 लाख की आबादी में कोई व्यक्ति अपराध करने या उंगली उठाने की हिम्मत नहीं करता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले रोज़ छह जवान मार देता था और देश रोता था, लेकिन अब आदेश है कि पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने की नीति अपनाई जा रही है।

कार्यक्रम में मौजूद हरिद्वार से आए संत सत्यदेव सरस्वती भी मंच पर बैठे इन बयानों को शांत भाव से सुनते रहे। कार्यक्रम समिति के एक सदस्य ने अंत में यह कहा कि सनातन सम्मेलन का उद्देश्य समाज में एकता, धार्मिक जागरूकता और सद्भाव बढ़ाना था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नंद किशोर गुर्जर के बयान व्यक्तिगत विचार हैं और सम्मेलन का आधिकारिक मत नहीं माने जा सकते।

यह पहली बार नहीं है जब नंद किशोर गुर्जर किसी विवादित बयान के कारण चर्चा में आए हों। इससे पहले भी कई मौकों पर उनके बयानों ने राजनीतिक हलकों, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बहस को जन्म दिया है।

7 जनवरी 2023 को उन्होंने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति बिजली विभाग का कर्मचारी बनकर जबरन किसी के घर में घुस आए, तो उसे मौके पर ही मार देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर लोग खुद ऐसा नहीं कर सकते, तो वे उन्हें बुला लें, वह खुद उसकी हत्या कर देंगे। इस बयान ने कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक प्रणाली और विधानभवन के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

फरवरी 2023 में निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने कहा था कि लोनी नगर पंचायत में न तो किसी शराब पीने वाले और न ही मांस खाने वाले व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा। उनका कहना था कि नेता ऐसा नहीं होना चाहिए जो शराब पीकर अपराध करे और अपने आप को जंगली पशु समझने लगे। उनके अनुसार, ऐसे लोगों की लोनी में कोई आवश्यकता नहीं है।

9 अक्टूबर 2022 को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों को लेकर कहा था कि वे किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन यदि कोई उनकी बहन-बेटियों को छेड़ेगा, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि “हम जिहादियों को मारेंगे, हमेशा मारेंगे।”

मार्च 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने घोषणा की थी कि लोनी क्षेत्र में बिना अनुमति के एक भी मांस या मीट की दुकान नहीं खुलेगी। उन्होंने तत्काल प्रभाव से मांस की दुकानों को बंद कराने की बात कही थी और दावा किया था कि वे लोनी को ‘लंदन’ बनाएंगे।

करीब एक साल पहले उन्होंने यह भी बयान दिया था कि समाजवादी पार्टी ने ही अतीक अहमद को यह डराकर मरवाया ताकि उसके राज न खुल जाएं।