Delhi car blast: दिल्ली कार ब्लास्ट से कैसे जुड़े डॉ. शाहीन शाहिद के तार ?Delhi car blast: दिल्ली कार ब्लास्ट से कैसे जुड़े डॉ. शाहीन शाहिद के तार ?

Delhi car blast: दिल्ली कार ब्लास्ट से कैसे जुड़े डॉ. शाहीन शाहिद के तार ?

दिल्ली में हुए बम धमाकों की जांच के दौरान लखनऊ की डॉक्टर शाहीन शाहिद का नाम सामने आने के बाद कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) में हड़कंप मच गया है। कॉलेज के डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ के बीच पूरे दिन इस खबर की चर्चा बनी रही। जिस नाम को कभी संस्थान की एक जानी-मानी प्रवक्ता के रूप में सम्मान के साथ लिया जाता था, अब वही नाम एक आतंकी मामले से जुड़ने के कारण कॉलेज समुदाय के लिए हैरानी और अविश्वास का कारण बन गया है।

कॉलेज सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन शाहिद का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के माध्यम से प्रवक्ता पद पर हुआ था। वर्ष 2006 में उनकी नियुक्ति जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में की गई थी। उस समय वे कॉलेज की सक्रिय और लोकप्रिय प्रवक्ता के रूप में जानी जाती थीं। उनके सहयोगियों का कहना है कि वह पढ़ाई-लिखाई में निपुण थीं और छात्रों के बीच उनका अच्छा प्रभाव था। लेकिन कुछ वर्षों बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2009 में डॉ. शाहीन का छह माह के लिए तबादला कन्नौज मेडिकल कॉलेज में किया गया था। उस दौरान उन्होंने वहां कुछ समय तक सेवाएं दीं, लेकिन 2013 में कॉलेज रिकॉर्ड के अनुसार वे बिना किसी औपचारिक सूचना के कार्य से अनुपस्थित हो गईं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कॉलेज ने कई बार पत्राचार कर उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी भी नोटिस का जवाब नहीं मिला। यहां तक कि उनके सहयोगियों ने भी निजी स्तर पर संपर्क साधने का प्रयास किया, मगर उनका कोई अता-पता नहीं चल पाया।

लगातार अनुपस्थिति और जवाब न देने के कारण शासन स्तर पर कार्रवाई की गई और अंततः वर्ष 2021 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

कॉलेज के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब से दिल्ली ब्लास्ट मामले में डॉ. शाहीन शाहिद का नाम सामने आया है, तब से पूरा कॉलेज सदमे में है। प्रोफेसर ने कहा, “डॉ. शाहीन एक पढ़ी-लिखी, समझदार महिला थीं। उन्होंने हमेशा खुद को एक सशक्त शिक्षिका के रूप में प्रस्तुत किया था। यह सुनकर भरोसा करना मुश्किल है कि वे किसी ऐसे गंभीर प्रकरण में शामिल हो सकती हैं।”
कॉलेज परिसर में मंगलवार को पूरे दिन इस मामले की चर्चा जोरों पर रही।

कई डॉक्टर और छात्र आपस में बातें करते नजर आए कि क्या सच में वही शाहीन हैं जो कभी कॉलेज में प्रवक्ता थीं। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर खबरें पढ़कर भी आपसी पुष्टि करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी खुलकर इस विषय पर बोलने को तैयार नहीं था।

डॉ. शाहीन शाहिद का निजी जीवन भी विवादों से घिरा रहा है। कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 में उनका तलाक उनके पति जफर आयात से हुआ था। तलाक के बाद वह लखनऊ में रहने लगीं। बताया जा रहा है कि उस दौरान कुछ समय के लिए उनका कोई ठिकाना स्पष्ट नहीं था। इस दौरान उनके कुछ पुराने सहयोगियों ने संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अब डॉ. शाहीन के पुराने रिकॉर्ड, संपर्क सूत्रों और गतिविधियों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। कॉलेज प्रशासन को भी शासन स्तर से निर्देश मिले हैं कि वे डॉ. शाहीन के कार्यकाल से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं। इसमें उनकी नियुक्ति, उपस्थिति, तबादला और अनुशासनिक कार्रवाई से जुड़े कागजात शामिल हैं।

कॉलेज प्रशासन ने सभी पुराने रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि अगर डॉ. शाहीन से जुड़े किसी और व्यक्ति या कर्मचारी के संदर्भ में कोई जानकारी सामने आती है, तो उसे तुरंत जांच एजेंसियों के साथ साझा किया जाए।

कॉलेज के कुछ पूर्व छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिस शिक्षक से उन्होंने मेडिकल एथिक्स और मानवीय संवेदनाओं की बातें सीखी थीं, उनके बारे में ऐसी खबर सुनकर गहरा झटका लगा है। कई लोग अब भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे कि वही डॉक्टर शाहीन शाहिद इस मामले में जांच के दायरे में आ सकती हैं।

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