पूर्व हॉकी कप्तान रानी रामपाल आज लेंगी सात फेरेपूर्व हॉकी कप्तान रानी रामपाल आज लेंगी सात फेरे

पूर्व हॉकी कप्तान रानी रामपाल आज लेंगी सात फेरे

 

भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और पद्मश्री से सम्मानित खिलाड़ी रानी रामपाल रविवार को अपने जीवन के सबसे खास सफर की शुरुआत करने जा रही हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पीपली स्थित पाल प्लाजा पैलेस में रानी की शादी चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न होगी

ये शादी पूरी तरह पारंपरिक अंदाज़ में होगी, जिसमें खेल जगत से लेकर राजनीति और बॉलीवुड तक की कई चर्चित हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।

रानी रामपाल हरियाणा के शाहाबाद के मॉडल टाउन की रहने वाली हैं। उनके घर में बीते कुछ दिनों से शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसी सभी रस्में परिवार और करीबी दोस्तों के बीच संपन्न हुईं

पिछले सप्ताह रानी और पंकज की रिंग सेरेमनी भी आयोजित की गई थी, जिसकी तस्वीरें रानी ने सोशल मीडिया पर साझा की थीं। तस्वीरों में दोनों बेहद खुश नजर आए और फैंस ने उन्हें शुभकामनाओं से भर दिया।

करीब दो महीने पहले दोनों परिवारों की सहमति से कुरुक्षेत्र में गुपचुप तरीके से इंगेजमेंट हुई थी। ये कार्यक्रम बहुत सीमित दायरे में रखा गया था, जिसमें रानी के कोच बलदेव सिंह भी मौजूद थे।

उस वक्त की एक तस्वीर, जिसमें रानी, पंकज और कोच बलदेव सिंह मुस्कुराते दिखे थे, सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

वहीं, रानी रामपाल ने खुद हरियाणा के CM सैनी को जाकर अपनी शादी का निमंत्रण दिया था। इस दौरान राज्य के मंत्री कृष्ण लाल बेदी भी उनके साथ मौजूद थे।

जिसके अलावा रानी ने PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, और खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खड़से समेत कई बड़े नेताओं और खिलाड़ियों को भी आमंत्रित किया है। माना जा रहा है कि, जिनमें से कुछ हस्तियां आज शादी समारोह में शामिल होने कुरुक्षेत्र पहुंच सकती हैं।

इस खुशी के मौके पर परिवार में उत्साह तो है, लेकिन थोड़ी भावुकता भी झलक रही है क्योंकि रानी के पिता रामपाल कैंसर से जूझ रहे हैं। परिवार के मुताबिक, वे अपनी बेटी की शादी देखने के लिए काफी समय से इंतजार कर रहे थे।

रानी के पिता ने ही बचपन में अपनी बेटी के अंदर खिलाड़ी बनने का सपना जगाया था और उस सपने को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की थी।
रानी रामपाल की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है।

उनके पिता तांगा चलाते थे, और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने रानी को कोच बलदेव सिंह के पास हॉकी सिखाने भेजा। उस समय रानी की उम्र सिर्फ 6 साल थी। यही से उनके सफर की शुरुआत हुई। शुरुआती दिनों में हॉकी किट खरीदना भी मुश्किल था, लेकिन पिता ने किसी तरह खर्च जुटाया और बेटी के सपनों को उड़ान दी।

आपको बता दें कि, रानी ने मात्र 14 साल की उम्र में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया था। साल 2010 में उन्होंने विश्व महिला हॉकी कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वे टूर्नामेंट की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं।

उन्होंने उस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई गोल दागे और टीम को कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। टोक्यो ओलिंपिक 2020 में रानी रामपाल की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए चौथा स्थान हासिल किया था।

ये ओलिंपिक में भारतीय महिला टीम का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। रानी के नेतृत्व, जज्बे और खेल भावना की सराहना पूरे देश ने की थी। उन्हें उनके योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार और भीम पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

फिलहाल रानी रामपाल पटियाला स्थित सरकारी हॉकी नर्सरी में कोचिंग दे रही हैं। वे नई पीढ़ी की खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर भारतीय महिला हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सपना देख रही हैं।