हिमाचल: किसने लिखा स्वास्थ्य मंत्री के बेटे को लिखा सह-अपराधी?हिमाचल: किसने लिखा स्वास्थ्य मंत्री के बेटे को लिखा सह-अपराधी?

हिमाचल: किसने लिखा स्वास्थ्य मंत्री के बेटे को लिखा सह-अपराधी?

 

 

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के बेटे संजय शांडिल को स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट में ‘सह-अपराधी’ यानी अकॉम्प्लिश के रूप में दर्शाया गया। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब सोशल मीडिया पर ये सूचना वायरल हुई और इस पर काफी आलोचना हुई

मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि संजय शांडिल के साथ दो विधायक और कुछ अधिकारी भी 2 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक लंदन और फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले थे।

इस दौरे की सूचना सोशल मीडिया पर फैलते ही राज्य में बवाल मच गया। नागरिकों और विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए कि, आखिर ऐसा क्यों किया गया और क्या इसे सही ठहराया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने इस पूरे मामले पर कहा कि, जो अधिकारी संजय शांडिल के लिए ‘सह-अपराधी’ शब्द का प्रयोग करने के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

शुरुआती योजना के अनुसार, ये दस सदस्यीय दल 2 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक यूरोप के दौरे पर जाने वाला था। इस दल में स्वास्थ्य मंत्री के बेटे, दो विधायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दौरे का उद्देश्य विदेशों में स्वास्थ्य सुविधाओं और तकनीक का अध्ययन करना था, ताकि हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बेहतर सेवाएं दी जा सकें

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धनीराम शांडिल ने कहा कि, फिलहाल ये दौरा स्थगित कर दिया गया है, लेकिन छह महीने के भीतर इसे फिर से आयोजित किया जा सकता है। मंत्री ने ये भी कहा कि, ये यात्रा स्वास्थ्य क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है, और इससे राज्य के अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी, किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने अफसरों और नेताओं की इस विदेश यात्रा को लेकर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी X पर पोस्ट करके इस मुद्दे को उठाया और कहा कि, ये यात्रा विवादास्पद है।

यात्रा की लागत हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बचत से चुकाई जानी थी। इसमें हवाई टिकट, वीजा शुल्क, आवास, बीमा और स्थानीय परिवहन के खर्च शामिल थे। हालांकि, जनता और विपक्ष ने इसे अनावश्यक और अव्यवस्थित खर्च बताया।

स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि, उन्हें इस शब्द के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि, जो अधिकारी संजय शांडिल के लिए ‘अकॉम्प्लिश’ शब्द का इस्तेमाल करने के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।

मंत्री ने ये भी कहा कि, उनकी प्राथमिकता राज्य के स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं को बेहतर बनाने की है और इस प्रकार की त्रुटियां आने वाले समय में नहीं दोहराई जाएंगी।

मंत्री ने ये भी जोड़ा कि, इस विदेश यात्रा का उद्देश्य हेल्थ सर्विसेज को और आधुनिक बनाना है। विदेश यात्रा में दल वहां की अस्पताल प्रणालियों, तकनीकी उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं का अवलोकन करेगा। इसका लाभ सीधे हिमाचल के अस्पतालों और मरीजों को मिलेगा।

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इस घटना ने राज्य में स्वास्थ्य विभाग की छवि को कुछ हद तक प्रभावित किया है। अधिकारियों और नेताओं के विदेश दौरे को लेकर जनता में सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, मंत्री ने विश्वास दिलाया कि, जवाबदेही तय की जाएगी और भविष्य में इस प्रकार की गलती नहीं होगी।

विदेश यात्रा स्थगित करने का निर्णय जनता के दबाव और सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद को मद्देनजर रखकर लिया गया। अब ये दल अगले छह महीनों के भीतर अपनी यात्रा कर सकता है। मंत्री ने ये स्पष्ट किया कि, यात्रा का उद्देश्य सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारना है, ना कि, किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए।

हिमाचल में हाल ही में रोबोटिक सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाओं की शुरुआत हुई है। विदेश दौरे के माध्यम से ये सुविधाएं और बेहतर बन सकेंगी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि, राज्य के स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखी जाएगी।

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