नाटो महासचिव मार्क रूट ने किया बड़ा दावानाटो महासचिव मार्क रूट ने किया बड़ा दावा

नाटो महासचिव मार्क रूट ने किया बड़ा दावा

 

नाटो महासचिव मार्क रूट ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो भारत पर 50% टैरिफ लगाया है उसका रूस पर अप्रत्यक्ष रूप से काफी बड़ा असर पड़ा है। ये टैरिफ विशेष रूप से उस समय लागू किया गया था, जब भारत रूस से तेल खरीद रहा था

मार्क रूट का दावा है कि, इस टैरिफ ने रूस की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, और भारत भी इससे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुआ है।

दरअसल रूट ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की है। बातचीत का उद्देश्य रूस की यूक्रेन पर रणनीति को स्पष्ट रूप से समझना और दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करना था

नाटो प्रमुख ने ये भी बताया कि, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने रूस के तेल व्यवसाय और भारत के ऊर्जा आयात पर असर डाला है, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक स्थितियों में बदलाव आया है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी रही है।

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रूस से ऊर्जा और रक्षा खरीद भारत के लिए महत्वपूर्ण रही है। हाल के वर्षों में यूक्रेन संकट की वजह से रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर रूस को आर्थिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से फोन पर बातचीत करते हुए कहा कि, भारत रूस के साथ अपने संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक दबाव को भी समझना जरूरी है। मोदी ने ये स्पष्ट किया कि, भारत अपने ऊर्जा हितों और आर्थिक स्थिरता के लिए रणनीतिक कदम उठाता रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया, जिसका उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीद को रोकना था। नाटो महासचिव मार्क रूट का कहना है कि, इस टैरिफ का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रूस की तेल और ऊर्जा आयात क्षमता पर भी प्रभाव पड़ा।

रूट ने कहा कि टैरिफ के कारण भारत को ऊर्जा के विकल्प खोजने पड़े और रूस की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति कमजोर हुई। उन्होंने ये भी बताया कि, भारत ने इस अवसर पर पुतिन से रणनीति पर चर्चा की ताकि यूक्रेन संकट और ऊर्जा संकट के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में कई देश आर्थिक और राजनीतिक दबाव का हिस्सा बन गए हैं। भारत ने हमेशा इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है और दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखने की कोशिश की है।

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रूट ने कहा कि, पीएम मोदी ने इस फोन कॉल में पुतिन से साफ तौर पर कहा कि यूक्रेन पर रूस की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव को समझना आवश्यक है। उन्होंने ये भी कहा कि, भारत का दृष्टिकोण हमेशा शांतिपूर्ण और कूटनीतिक रहा है।

भारत और रूस के बीच पुराने दोस्ताना संबंध रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी है। नाटो प्रमुख के अनुसार, इस फोन वार्ता ने भारत और रूस के बीच भरोसे को मजबूत किया और दोनों देशों को वैश्विक दबावों के बावजूद रणनीतिक निर्णय लेने का अवसर मिला।

रूट ने ये भी बताया कि, अमेरिका के टैरिफ ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर डाला, लेकिन भारत और रूस ने इसे संतुलित तरीके से हैंडल किया। भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी, लेकिन वैश्विक दबावों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक और रणनीतिक संतुलन बनाए रखा।

वहीं नाटो प्रमुख के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पीएम मोदी की पुतिन से बातचीत ने ये दिखाया कि, भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीति में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम है।

अमेरिकी टैरिफ और रूस पर उसके प्रभाव के बीच भारत ने एक मध्य मार्ग अपनाया है, जो उसके आर्थिक और रणनीतिक हितों के अनुकूल है।

इस फोन कॉल ने ये भी संकेत दिया कि, भारत वैश्विक संघर्षों और दबावों के बीच अपने कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में सक्षम है। भविष्य में भारत और रूस के संबंध और भी गहरे हो सकते हैं, और यूक्रेन संकट के समाधान में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण बन सकती है।